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एसीबी जांच में खुलासा: जम्मू कश्मीर में सोलर लाइट आवंटन में 10 करोड़ की चपत, सीईओ-ठेकेदारों पर केस

Sun, 04 Sep 2022 04:03 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

प्रदेश में 2009 से 2014 के दौरान लाइटें लगाने के लिए अनुबंध हुआ। 44483 सोलर होम लाइटें पांच साल की अवधि के  लिए सप्लाई की गईं। इसमें कमीशनिंग, वारंटी और मुफ्त रखरखाव के लिए काम भी किया जाना था।
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Solar Street Light - फोटो : iStock
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विस्तार
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सोलर होम लाइट आवंटन में गड़बड़ी से सरकारी खजाने को दस करोड़ से ज्यादा की चपत लगाने पर जम्मू-कश्मीर एनर्जी डवलपमेंट एजेंसी (जकेडा) के तत्कालीन सीईओ समेत अन्य पर एफआईआर दर्ज हो गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने 2009 से 2014 तक सोलर होम लाइट आवंटन में भारी गड़बड़ी पाई है।

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इसमें जकेडा के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी गुलजार हुसैन निवासी चिंगराह कारगिल, एमएस ग्रीन टेकभनोलॉजी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड श्रीनगर के मालिक जावेद अहमद कैंथ, मेसर्ज टाटा पॉवर सोलर सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड व अन्य के खिलाफ प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 2006 की धारा 5(1)(सी), 5(1)(डी) आर/डब्ल्यू धारा 5(2) और धारा 120-बी आरपीसी के तहत मामला दर्ज किया है। 

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि ठेकेदार जावेद अहमद निवासी अनंतनाग मौजूदा समय में रावलपोरा श्रीनगर ने जकेडा के अधिकारियों के साथ मिलकर हेराफेरी को अंजाम दिया। 
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2009 से 2014 के दौरान लाइटें लगाने के लिए अनुबंध हुआ। 44483 सोलर होम लाइटें पांच साल की अवधि के लिए सप्लाई की गईं। इसमें कमीशनिंग, वारंटी और मुफ्त रखरखाव के लिए काम भी किया जाना था।

जांच में सामने आया कि कंपनी द्वारा 44,435 यूनिट की आपूर्ति की गई थी, जिसके लिए यूनिट राशि की कुल लागत का 70 प्रतिशत की दर से भुगतान किया गया। 35,750 लाइटों की कुल लागत का 20 प्रतिशत यानी 5,85,52,495 की कुल राशि का भुगतान हुआ। वर्ष 2014-15 में संबंधित बीडीओ कार्यालय से लाभार्थियों को सोलर होम लाइटें जारी की गईं।

इनमें से केवल 80 प्रतिशत लाइटें काम करने की स्थिति में पाई गईं। लाइटों की पांच साल तक निशुल्क मरम्मत की जानी थी, लेकिन इस पहलु पर कोई काम नहीं किया गया। टेंडर जारी करते समय भी जकेडा की ओर से चहेतों को काम देने के लिए शर्तें लागू की गईं।

इस पूरी छानबीन में प्रथम दृष्टया साबित हुआ है कि सीईओ व अन्य अधिकारियों ने ठेकेदारों के साथ मिलकर साजिश के तहत हेराफेरी को अंजाम दिया, जिससे सरकारी खजाने को 10,11,71,657 रुपये की चपत लगी। जेएनएफ

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