अखंड सौभाग्य के लिए सोलह श्रृंगार से सजीं महिलाओं ने कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि शुक्रवार को सिद्धि योग के महासंयोग में करवा चौथ का व्रत रखा। सुबह सरगी के बाद करीब 17 घंटे का निर्जला उपवास रखा।
शाम 8 बजे के बाद चांद को अर्घ्य देते हुए सुहागिनों ने अपने पति की सलामती के लिए ईश्वर से अखण्ड सौभाग्य का वरदान मांगा और उनके हाथों से पानी पीकर अपना व्रत खोला।
मंदिरों के शहर जम्मू में डोगरी,पंजाबी, मारवाड़ी, बिहारी व कई अन्य समुदायों सहित सामाजिक संगठनों की महिलाओं ने शुक्रवार को करवा चौथ पूरे विधि-विधान के साथ मनाया। सुहागिनों ने शाम 4 बजे से शाम 6 बजे तक कई स्थानों पर सामूहिक रूप से करवा चौथ की कथा सुनी और करवा बंटा।
करवा बंटाते समय लोकगीत करवड़ा ले करवड़ा, सर्व सुहागन करवड़ा, वटाइए नीं, कत्ती न अटेंगे न... गाकर पूजा पूरी की। शहर के ग्रीन बेल्ट पार्क के समीप स्थित श्री महामंगलेश्वर मंदिर (पंच मंदिर) की ओर से शुक्रवार को करवा चौथ को लेकर सामूहिक पूजन का आयोजन किया गया।
इसमें सैकड़ों से ज्यादा सुहागिनें करवा स्थापित कर अखंड सौभाग्य के लिए पूजा की। इसके बाद सुहागिनें अपने स्थान पर बैठकर पांच बार थाल बांटी और इसी बीच कथा भी सुनी। हाथों में मेहंदी लगाए, सोलह श्रृंगार किए दुल्हन की तरह तैयार होकर सभी ने पूजा की। कई महिलाओं ने पहली बार करवाचौथ का व्रत रखा था।
चंद्रदेव को अर्घ्य देकर पति की आरती उतारी
महिलाओं में सुबह से ही करवा चौथ को लेकर जबरदस्त उत्साह रहा। महिलाएं चांद निकलने का इंतजार करतीं दिखीं। जैसे ही चांद दिखा, सुहागिनों ने अर्घ्य दिया। इसके बाद पति की आरती उतारी।