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Jammu News: केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में आठ साल में सबसे कमजोर विंटर सीजन, तीन साल से लगातार गिरावट

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भविष्य में प्रदेश के बिजली, पानी और कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा प्रभाव
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अमित कुमार
जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में आठ साल की तुलना में इस साल अब तक सबसे कमजोर सर्द सीजन रहा है। दिसंबर से फरवरी की अवधि वाले इस सीजन में तीन साल से लगातार गिरावट आ रही है। इसमें सामान्य से 16 से 80 फीसदी तक कम बारिश हुई है।
हालांकि, वर्ष 2019 में सामान्य से 71 फीसदी तक अधिक बारिश भी हो चुकी है। लेकिन, लगातार बारिश का स्तर गिरना हिमालयन क्षेत्र के भविष्य के लिए खतरे के संकेत हैं। इसमें प्रदेश में बिजली व पानी का संकट बढ़ने के साथ कृषि क्षेत्र भी प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन और अन्य कारणों से जोड़कर देख रहे हैं।
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विशेषज्ञों के अनुसार अगर लगातार बारिश का स्तर गिरने का सिलसिला जारी रहा तो जम्मू-कश्मीर के साथ लद्दाख व अन्य हिमालयन क्षेत्रों के तापमान में वृद्धि होगी। प्रदेश सरकार भी इस खतरे को गंभीरता से ले रही है। सरकार जल प्रबंधन और संरक्षण के लिए उचित उपाय करने पर जोर दे रही है। वर्तमान में बारिश के भारी गिरावट स्तर से कश्मीर में कई प्राकृतिक चश्मे पूरी तरह से सूख गए हैं। झेलम, लिद्दर समेत कई नदियों का जलस्तर भी अब तक के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। जम्मू संभाग में भी चिनाब नदी, तवी और बसंतर नदी के जलस्तर गिरा हुआ है। बर्फबारी न होने से गुलमर्ग में भी विंटर खेलों को रद्द करना पड़ा है।


जनवरी से 20 फरवरी तक की बारिश (मिलीमीटर में)
स्थान औसत वास्तविक सामान्य गिरावट
कश्मीर संभाग 150.93 28.62 माइनस 81.03
जम्मू संभाग 179.21 31.1 माइनस 82.64

आठ साल में बारिश का आंकड़ा (मिमी में)
वर्ष वास्तविक सामान्य स्तर (गिरावट व अधिक)
2018 151.2 225.4 माइनस 33
2019 386.1 225.4 प्लस 75
2020 171.1 225.4 माइनस 24
2021 183.6 225.4 माइनस 19
2022 263.5 225.4 प्लस 17
2023 189 225.4 माइनस 16
2024 129.3 225.4 माइनस 43
2025 55 225.4 माइनस 80

वर्तमान परिस्थितियों के अनुकूल कृषि क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित : निदेशक
कृषि निदेशक जम्मू एएस रीन ने बताया कि जलवायु परिवर्तन को देखते हुए जम्मू-कश्मीर में मौसम के मुताबिक फसलों को तैयार करने पर काम किया जा रहा है। इसमें छोटी जगहों पर फसल लगाने, कम सिंचाई से अधिक उत्पादन, माइक्रो सिंचाई परियोजनाओं पर सब्सिडी बढ़ाने, नए बीजों को लाने आदि उपायों के साथ कृषि उत्पादन में संतुलन बनाए रखने पर काम किया जा रहा है।
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प्रदेश में नहीं बने मजबूत पश्चिमी विक्षोभ : मौसम निदेशक
आठ साल में इस साल अब तक सबसे कम बारिश हुई है। चिंता यह है कि तीन साल से गिरावट का स्तर लगातार गिर रहा है। प्रदेश में अब तक सीजनल मजबूत पश्चिमी विक्षोभ नहीं बने हैं। नमी नहीं है। भारी बारिश नहीं हुई है। यह वैश्विक जलवायु परिवर्तन है। इसका मौसम से जुड़े लगभग सभी क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ सकता है।
- डाॅ. मुख्तियार अहमद, निदेशक, मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर
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