बसें न चलने से लोग ऑटो पर रहे निर्भर, चुकाना पड़ा अतिरिक्त किराया
पड़ोसी राज्याें की बसें भी रहीं बंद, पैदल चलने को हुए लोग मजबूर
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू बंद के चलते प्रदेश परिवहन व ई-बस सेवा बंद रही। रेल के माध्यम से ही लोगों को जम्मू से पंजाब और अन्य राज्यों की ओर सफर करना पड़ा है। सुबह के समय जम्मू-कश्मीर रोड ट्रांसपोर्ट (जेकेआरटीसी) की तीन बसें लांग रूट के लिए रवाना हुईं। इसके बाद दिनभर में सेवा बंद रही।
इस कारण लोगों को गंतव्य पर पहुंचने में परेशानी आई। हालात यह रहे कि कर्मचारियों को निजी वाहनों या फिर पैदल चलकर कार्यालयों में पहुंचना पड़ा। वहीं, रेलवे स्टेशन से यात्रियों को पैदल बस स्टैंड और अन्य जगहों की ओर जाते देखा गया।
शहर में कई स्थानों पर लोगों को ई-बसों का इंतजार करते देखा गया। ई-बस के एजीएम सुधीर गुप्ता के अनुसार बसों को न चलने के निर्देश मिले थे, जिस पर अमल किया गया है। 30 से ज्यादा रूटों पर बसें नहीं भेजी गई हैं। इसी तरह परिवहन विभाग की बसें भी नहीं चलीं।
तवी पुल सहित अन्य चौक-चौराहों पर प्रदर्शन के कारण भी लोगों को रुकना पड़ा। इतना ही नहीं पड़ोसी राज्यों से भी बसें जम्मू में नहीं पहुंची।
कितने यात्री करते हैं सफर
ई-बसों में रोजाना औसतन एक लाख से ज्यादा लोग यात्रा करते हैं। कुल आठ लाख कमाई एक दिन में होती है। इसी तरह परिवहन निगम की बसों से तीन ने चार लाख लोग यात्रा करते हैं। 50 हजार से ज्यादा लोग एक जिले से दूसरे जिले में जाते हैं।
इसलिए होता है सरकारी सेवा का इस्तेमाल
सरकारी बसों में सफर करने से समय की बचत होती है। सवारियों से भी निर्धारित किराया ही लिया जाता है। ऐसे में लोग ज्यादा सफर करते हैं। लांग रूट में तो बसें हर रोज फुल होकर जाती हैं।
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एक से दो किलोमीटर का भी देना पड़ा 200 रुपये किराया
जम्मू बंद के चलते यात्रियों को ऑटो से एक से दो के किलोमीटर के सफर के लिए 100 से 200 रुपये किराया अदा करना पड़ा। मेटाडोर और अन्य परिवहन सेवा बंद होने से ई-रिक्शॉ और ऑटो चलते रहे। लोगों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए जेब खूब ढीली करनी पड़ी है।