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Jammu News: जन्म के बाद 61 फीसदी जच्चा-बच्चा को नहीं मिल पाती सही चिकित्सा देखभाल

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- करीब 75 फीसदी महिलाएं नहीं करवातीं प्रसव से पहले चार जांचें
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- जम्मू और कठुआ में झुग्गियों में रहने वाली महिलाओं पर शोध में सामने आई जानकारी

अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू और कठुआ में झुग्गियों में रहने वाली करीब 61 महिलाओं को प्रसव के बाद सही चिकित्सा देखभाल नहीं मिल पाती है। करीब 40 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं, जो प्रसव से पहले पूरी जांच नहीं करवाती हैं। जम्मू विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग की ओर से झुग्गियों में रहने वाली महिलाओं के स्वास्थ्य पर किए गए एक शोध में यह खुलासा हुआ है।

शोधार्थी शिवानी शर्मा ने इस शोध के दौरान जम्मू की कालिका कॉलोनी, धौंतली, राजीव नगर और कठुआ जिले की कृष्णा कॉलोनी, इंदिरा कॉलोनी और लक्करसंद-ऑरलीबंद इलाके की करीब 500 महिलाओं से बात की। उन्होंने महिलाओं से उनके स्वास्थ्य, प्रसव से पहले और बाद में देखभाल और सामान्य जीवन को लेकर सवाल-जवाब किए और जानकारी जुटाई।
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इसमें सामने आया कि दोनों जिलों की 75 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं, जो प्रसव से पहले तीन या तीन से कम बार जांच करवा पाती हैं। यह आंकड़े चिंताजनक हैं, क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) प्रसव से पहले कम से कम चार जांचें करवाने की सलाह देता है। शोध में सामने आया कि एकल परिवारों की अपेक्षा संयुक्त परिवारों में रहने वाली महिलाओं को प्रसव के बाद सही देखभाल नहीं मिल पाती।
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इसकी सबसे बड़ी वजह महिलाओं पर परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी का होना है।


40 फीसदी महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स सामान्य से कम, बच्चे के लिए भी खतरा
शोध में सामने आया कि करीब 40 फीसदी महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स सामान्य से कम है। यानी लंबाई के लिहाज से उनका वजन कम है। यह महिलाओं के लिए शारीरिक कमजोरी का सूचक है। खास करके गर्भावस्था में इससे गम्भीर खतरा हो सकता है। इससे कमजोर और समय से पहले बच्चा पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है। गर्भ में भी बच्चे का विकास रुक सकता है। साथ ही शरीर में ताकत की कमी के कारण प्रसव में भी कठिनाई हो सकती है।
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