कोविड के बाद भारत-पाक के बीच तनाव से कई निजी स्कूलों ने शुरू की यह व्यवस्था
पढ़ाई के लिए फिर मोबाइल से घंटों चिपक रहे हैं बच्चे
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। भारत-पाक के बीच बढ़े तनाव से कोविड के पांच साल बाद स्कूलों में फिर ऑनलाइन मोड से शिक्षा देने का दौर लौटा है। कई निजी स्कूलों ने इसे अमल में लाया है। ऐसी परिस्थितियों में बच्चों की पढ़ाई जरूरी है, लेकिन ऑनलाइन मोड में उनके मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की भी जरूरत है।
मनोचिकित्सकों के अनुसार बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई में उनके स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए अभिभावकों की भूमिका अहम रहती है। इसके लिए कई आवश्यक उपाय किए जाने चाहिए। शहर के कई निजी स्कूलों ने बच्चों को ऑनलाइन मोड से पढ़ाई देना शुरू कर दिया है। हालांकि, शिक्षा विभाग की ओर से अभी कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।
सीमित समय के लिए यह व्यवस्था ठीक है, लेकिन अगर सीमा पर तनाव बढ़ता है और शिक्षण संस्थान बंद रहते हैं तो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पढ़ना लाजमी है। वरिष्ठ मनोचिकित्सक डाॅ. जगदीश थापा के अनुसार कोविड के बाद ऑनलाइन मोड से फिर पढ़ाई की व्यवस्था हुई है। पिछले अनुभव में हमने इसके अच्छे और बुरे परिणाम देखे हैं।
इससे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ा है। वर्तमान परिस्थितियों में ऑनलाइन मोड से पढ़ाई की जा सकती है, लेकिन इसके लिए बच्चों की सेहत पर खास ध्यान देना जरूरी है। कुछ घरों में तनावपूर्ण या अव्यवस्थित माहौल होता है, जो आनलाइन पढ़ाई के दौरान बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है।
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कोट
पारंपरिक स्कूलिंग में शिक्षक और छात्र के बीच भावनात्मक संबंध बनते हैं, जो आत्म विश्वास और प्रेरणा के लिए जरूरी होते हैं। ऑनलाइन माध्यम से यह संबंध कमजोर हो सकते हैं। स्कूल में पढ़ाई से बच्चों को अनुशासन, समय प्रबंधन और नियमित दिनचर्या सीखने को मिलती है, जो ऑनलाइन पढ़ाई में प्रभावित होती है। इसलिए ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों की मानसिक सेहत पर खास ध्यान दिया जाना चाहिए।
- डाॅ. प्रवीण योगराज, पूर्व चिकित्सा अधीक्षक, गांधीनगर अस्पताल
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इस पर दें ध्यान
-बच्चों की आनलाइन पढ़ाई में अभिभावकों की निगरानी जरूरी
-पढ़ाई के मुताबिक मोबाइल पर स्क्रीन टाइम तय हो, ऐसा न होने से नींद की समस्या, आंखों में जलन, चिड़चिड़ापन आदि समस्या रहती है
-मोबाइल पर अधिक झुककर पढ़ाई न करें, गर्दन दर्द और दूसरी समस्याएं हो सकतीं हैं
-पढ़ते समय बीच में शरीर की मूवमेंट जरूरी हो, वजन आदि बढ़ सकता है
-छोटे बच्चों को स्वतंत्र रूप से मोबाइल न दें
-ऑनलाइन पढ़ाई में सहपाठियों से संवाद न होने पर अकेलापन, तनाव और डिप्रेशन से बचाव के उपाय करें
ये हैं फायदे
-बच्चे कम उम्र में तकनीक और डिजिटल टूल्स का प्रयोग करना सीख जाते हैं
-कई ऑनलाइन प्लेटफार्म व्यक्तिगत कंटेंट देते हैं, जिनसे बच्चों की समझ बेहतर होती है