अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग में बाल और स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी बेहतर चिकित्सा देखभाल में रोड़ा बन रही है। खासतौर पर दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों को शहरी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इन इलाकों में 30 से 45 फीसदी तक बाल और स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है।
स्वास्थ्य विभाग की बात करें तो जम्मू संभाग के 10 जिलों में 57 बाल रोग विशेषज्ञों के पद सृजित हैं, पर तैनात 32 ही हैं। यानी 44 फीसदी पद रिक्त हैं। इसी तरह स्त्री रोग विशेषज्ञ के 78 पद सृजित हैं, लेकिन तैनात 55 ही हैं। यानी यहां भी 29 फीसदी तक विशेषज्ञों की कमी है। ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में हालत ज्यादा खराब है।
इसी तरह चिकित्सा शिक्षा विभाग में जीएमसी जम्मू से संबद्ध अस्पतालों के बाल रोग विभागों के 23 पदों में से 18 पर ही तैनाती है। वहीं, स्त्री रोग विभाग के 40 पदों पर 33 संकाय सदस्य तैनात हैं।
एसएमजीएस अस्पताल पर है 10 जिलों के मरीजों का दबाव
400 बिस्तर की सुविधा, लेकिन ज्यादातर भरे रहते हैं
जम्मू। शहर के प्रमुख जच्चा-बच्चा अस्पताल एसएमजीएस पर जम्मू संभाग के 10 जिलों के बाल और स्त्री रोग के गंभीर मरीजों का दबाव है। अस्पताल में बाल रोगियों के लिए 400 बेड हैं। लेकिन, ज्यादातर भरे ही रहते हैं। कई बार संख्या बढ़ने पर एक बेड पर दो से तीन मरीजों को रखना पड़ता है। अस्पताल में क्या-क्या सुविधाएं हैं, पेश है रिपोर्ट...
अस्पताल में पांच नवजात शिशु गहन देखभाल इकाई (एनआईसीयू) हैं। इनमें करीब सौ बिस्तर हैं। इसी तरह से 17 बिस्तर वाला एक पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) है। वहीं, 10 बिस्तर वाला रेस्पिरेटरी आईसीयू भी है। बाल रोगियों के लिए दो मशीनों वाला डायलिसिस यूनिट हैं।
थैलेसीमिया के रोगियों के लिए 14 बिस्तर वाला एक डे केयर सेंटर है। इसमें वर्तमान में 370 बच्चे पंजीकृत हैं। हीमोफीलिया रोगियों के लिए 10 बिस्तर वाला एक डे केयर सेंटर है, जिसमें करीब 170 बच्चे पंजीकृत हैं।
पीडियाट्रिक कैंसर वार्ड में 400 बाल कैंसर रोगी पंजीकृत हैं। यह 10 बिस्तर वाला सेंटर है। इसके अलावा 20 बेड वाला न्यूट्रिशन पुनर्वास केंद्र है। यहां पोषण के लिहाज से कमजोर बच्चों को 2 से 3 महीने रखकर इलाज दिया जाता है। जिला अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीआईसी) में दिव्यांग बच्चों को इलाज दिया जा रहा है। यहां से पीजीआई जैसे संस्थानों में भी रोगियों को रेफर किया जाता है। यहां उनको निशुल्क चिकित्सा दी जाती है।
शहर के एक अन्य एमसीएच गांधीनगर अस्पताल में 100 बिस्तर हैं। एसएमजीएस में करीब 70 बाल वेंटिलेटर हैं, जबकि एमसीएच अस्पताल में पांच। एसएमजीएस अस्पताल में अतिरिक्त सौ बिस्तर वाले ब्लॉक का प्रस्ताव बनाया गया था, लेकिन अब तक इस पर कुछ नहीं हुआ है।
भर्ती करने वाली एजेंसी को भेजे गए खाली पद
जीएमसी जम्मू के प्रिंसिपल डॉक्टर आशुतोष गुप्ता का कहना है कि बाल और स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी दूर करने के लिए भर्ती एजेंसी को रिक्त पद रेफर किए गए हैं। वहीं, स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डॉक्टर हमीद जरगर का कहना है कि संभाग स्तर पर बाल और स्त्री रोगियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। खाली पदों को भरने के लिए प्रक्रिया जारी है।