250 करोड़ रुपये से अधिक देनदारी, आज राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के सीईओ को स्थिति से करवाएंगे अवगत
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य सेहत योजना के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों और डायलिसिस केंद्रों ने सरकार की एक माह तक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की अपील ठुकरा दी है। कहा कि सरकार निजी स्वास्थ्य संस्थानों की 250 करोड़ रुपये से अधिक देनदारी है। सोमवार को राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के सीईओ से मुलाकात कर स्थिति से अवगत करवाएंगे।
इन स्वास्थ्य संस्थानों का राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के साथ पंजीकरण 15 मार्च को समाप्त हो गया है। इससे ऐसे संस्थानों ने सेहत योजना के तहत मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं देना बंद कर दिया है, जिससे सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का लोड अचानक बढ़ गया है। खासतौर पर सर्जरी के मामलों में मरीज अधिक परेशान होंगे।
निजी अस्पताल व डायलिसिस सेंटर एसोसिएशन के प्रधान संदीप मैंगी ने बताया कि सरकार ने हमें पंजीकरण समाप्त होने के बाद भी पुराने अनुबंध (पीएस 7) के तहत एक माह तक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने की अपील की है। लेकिन, वर्तमान वित्तीय परिस्थितियों में हमारे लिए स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखना संभव नहीं है। पहले से ही करोड़ों रुपये की देनदारी से निजी स्वास्थ्य संस्थानों पर वित्तीय बोझ है।
नई दरों से निजी स्वास्थ्य संस्थानों को होगा नुकसान
प्रधान ने बताया कि नए पीएस 8 पैकेज के तहत यूटी से निजी संस्थानों को मिलने वाले 10 प्रतिशत प्रोत्साहन को खत्म कर दिया गया है। इसके अलावा नए पैकेज में गाल ब्लैडर, अपैंडिक्स, बवासीर और फिशर सर्जरी को निजी अस्पतालों की सूची से बाहर कर दिया है। अब इन सर्जरी का सिर्फ सरकारी अस्पतालों में करवाने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा नए पैकेज में प्रत्येक डायलिसिस की दर 1300 निर्धारित की है, जबकि इससे पहले यह दर 1650 रुपये थे। नई दरों में कटौती से निजी स्वास्थ्य संस्थानों को वित्तीय नुकसान होगा।