अंकुश का शव पहुंचते परिजनों की चीख पुकार से गूंजा जीएमसी
बहन के घर गया था मां के लिए खाना लाने
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। सुनीता देवी को क्या पता था कि जिस अस्पताल में वह इलाज के लिए आई है वहीं, में शाम को बेटे का शव देखने को मिलेगा। सिद्दड़ा में हाईवे पर रविवार शाम को हुए हादसे में मारे गए अंकुश (22) का शव जैसे ही जीएमसी में पहुंचा तो पूरा परिसर परिजनों की चीख पुकार से गूंज उठा।
किसी को समझ नहीं आ रहा था कि वे बीमार मां को संभालें या फिर अंकुश के शव को देखें। इस बीच बड़ी संख्या में लोग परिवारवालों को ढांढस देते नजर आए। अंकुश मां के लिए बाग-ए-बाहु क्षेत्र में स्थित अपनी बहन के घर से खाना लेने गया था, लेकिन रात को मृत लौटा।
पुलिस वाहन से अंकुश का शव इमरजेंसी के बाहर पहुंचते ही परिवारवालों का रो-रोकर बुरा हाल था। पिता बचन लाल सिर पर हाथ रखकर रो रहे थे। साथ ही कह रहे थे कि मैं इसकी मां को अब क्या बताऊंगा। वहीं, परिवार के अन्य सदस्यों को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वे क्या करें।
पहले तो बेटे के मारे जाने के बारे में सुनीता को कुछ नहीं बताया गया, लेकिन परिवार के सदस्यों के चेहरों को देखकर वह भाप गई थी और खुद ही इमरजेंसी तक पहुंच गई। जैसे ही उसने स्ट्रेचर पर बेटे के शव को पड़ा देखा उसने होश खो दिया। वह जोर-जोर से रोने लगी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर कोई गमगीन हो गया। स्टाफ सदस्यों के साथ अन्य लोग मां को चुप करवाने की कोशिश कर रहे थे।
इसके बाद पूरे परिवार के सदस्य इमरजेंसी के बाहर आकर विलाप करने लगे। पिता बचन लाल ने बताया कि अंकुश दोपहर को अपनी बहन के घर से खाना लेने के लिए गया था। वह घर में सबसे छोटा बेटा था। उसकी मां को शरीर में खून की कमी के कारण गत शनिवार को जीएमसी में भर्ती कराया गया था और रविवार को रक्त चढ़ना था। लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। अंकुश के जाने से मेरा सब कुछ लुट गया है। अंकुश का शव अस्पताल के शवगृह में रखा गया है।