कठुआ जीएमसी में गैंगस्टरों के साथ मुठभेड़ में सब इंस्पेक्टर के बलिदान होने से पुलिस महकमा सकते में है। अब तक पुलिस अफसरों की शहादत आतंकियों से लोहा लेते हुए हुई है, लेकिन पहली बार कोई अफसर गैंगस्टरों के हमले से बलिदान हुआ है।
दरअसल, कुख्यात बदमाशों की नशा तस्करी में बढ़ती संलिप्तता ने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। अपराध और नशे का कनेक्शन बढ़ने से अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे पुलिस पर हमला करने से भी नहीं चूक रहे। बीते तीन वर्ष में पुलिस पर इस तरह के कई बड़े हमलों ने पुलिस की साख दांव पर लगा दी है। नशा तसकर, पशु तस्कर, भू माफिया लगातार पुलिस पर हमले कर रहे हैं।
केस 1 : 12 दिसंबर 2022 को जम्मू पुलिस ने शहर के मार्वल मार्केट से कुख्यात अपराधी हरप्रीत सिंह खालसा उर्फ अमित रैना को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार करते वक्त हरप्रीत ने पुलिस टीम पर पिस्टल से फायरिंग की। किसी तरह से पुलिसकर्मियों ने जान बचाई। हरप्रीत सिंह पर पूर्व एमएलसी टीएस वजीर की हत्या, कारोबारी राकेश अग्रवाल के घर डकैती और कारोबारी नागर सिंह की हत्या करने की साजिश रचने का मामला दर्ज है।
केस 2 : जुलाई 2022 में बिश्नाह के दयोली गांव में नशा तस्करों ने पुलिस की स्पेशल ब्रांच के दो कर्मियों गणेश दत्त और फजल चौधरी को बंधक बनाकर पीट दिया। ठीक इसी तरह की घटना मार्च 2024 को जम्मू के फलायं मंडाल में नशा तस्करों ने स्पेशल ब्रांच के दो कर्मियों को बंधक बनाकर पीटा।
केस 3 : छह अक्तूबर 2023 को बाड़ी ब्राह्मणा के सरोर में नशा तस्करों ने पुलिस और एनसीबी की टीम पर हमला कर दिया। इसमें चार पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसके अलावा माइनिंग विभाग के कर्मियों पर माइनिंग तस्करों की ओर से कई बार हमले किए गए हैं।
तस्करों, गैंगस्टरों के पास हथियार कैसे
बता दें कि आचार संहिता लागू होने के बाद तमाम लाइसेंस धारकों को हथियार थानों में जमा कराने के लिए कहा जा रहा है। बावजूद इसके हथियार जमा नहीं हो रहे। गैंगस्टरों, नशा तस्करों के पास हथियार हैं और वे सरेआम पुलिस पर हमले कर रहे हैं।