इसके बाद पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती 1996 में कांग्रेस की टिकट पर जीत हासिल कर बिजबिहाड़ा क्षेत्र से अपनी चुनावी राजनीति की शुरुआत की। सईद ने बाद में पीडीपी नाम से नई पार्टी का गठन किया।
इसके बाद मुफ्ती मोहम्मद सईद के करीबी और पीडीपी के वरिष्ठ नेता अब्दुल रहमान भट ने 2014 तक जम्मू-कश्मीर में हुए आखिरी विधानसभा चुनाव तक बिजबिहाड़ा सीट से लगातार चार चुनाव जीते। भट को इस बार शांगस-अनंतनाग पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी ने टिकट दिया है।
कश्मीर की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी ने बशीर अहमद शाह पर विश्वास जताते हुए टिकट दिया है। हालांकि इससे पहले वह दो बार हार का समाना कर चुके हैं। जब नेकां ने 2009 से 2014 तक कांग्रेस के साथ गठबंधन सरकार बनाई तो उन्हें एमएलसी बनाया गया था। इस सीट पर न केवल दो पार्टियों बल्कि शाह और मुफ्ती परिवार की भी साख टिकी है। दोनों परिवारों के बुजुर्ग भी इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
यूसुफ भाजपा का वो चेहरा हैं जो आतंकवाद के चरम में भी पार्टी के लिए डटे रहे। वो ऐसे समय में पार्टी का चेहरा बने जब आतंकियों के डर से कोई भाजपा का नाम तक नहीं लेता था। वह पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार में एमएलसी भी रहे हैं।