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Jammu Election: इस सीट पर त्रिकोणीय लड़ाई... कलम इतिहास लिखने, कमल खिलने को बेताब; खानदानी सीट बचा पाएंगी ये?

Sun, 01 Sep 2024 11:45 AM IST
शाहरुख खान अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, श्रीनगर

सार

जम्मू-कश्मीर में यहां विरासत की लड़ाई है। त्रिकोणीय मुकाबले में कलम इतिहास लिखने और कमल खिलने को बेताब है। इनके लिए खानदानी सीट बचाना साख का सवाल बन गया है। 
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Jammu Election - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दक्षिण कश्मीर की श्रीगुफवारा-बिजबिहाड़ा विधानसभा सीट पर इस बार त्रिकोणीय जंग के आसार हैं। इस सीट पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बेटी इल्तिजा मुफ्ती को किस्मत आजमाने का मौका दिया है। इस सीट से मुफ्ती परिवार की तीसरी पीढ़ी राजनीतिक सफर की शुरुआत कर रही है। 
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इससे पहले मां महबूबा मुफ्ती और दादा मुफ्ती मोहम्मद सईद राजनीतिक सफर की शुरुआत इसी सीट से कर चुके हैं। श्रीगुफवारा-बिजबिहड़ा विधानसभा क्षेत्र 2022 के परिसीमन से पहले बिजबिहाड़ा निर्वाचन क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। 

यहां 18 सितंबर को जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के पहले चरण में मतदान होने जा रहा है। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले का यह क्षेत्र 1996 से पीडीपी का गढ़ है। यहीं से पहले चरण की सभी 24 विधानसभा सीटों में सबसे कम तीन उम्मीदवार हैं। 
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मैदान में इल्तिजा के अलावा नेशनल कॉन्फ्रेंस से बशीर अहमद शाह और भाजपा से सोफी मोहम्मद यूसुफ हैं। बिजबिहाड़ा में जीत का चौका लगा चुकी है पीडीपीमहबूबा मुफ्ती के पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद ने 1962 में गुलाम मोहम्मद सादिक के नेतृत्व वाले नेशनल कॉन्फ्रेंस गुट के उम्मीदवार के रूप में बिजबिहाड़ा सीट से जीत के साथ राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। 

इसके बाद पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती 1996 में कांग्रेस की टिकट पर जीत हासिल कर बिजबिहाड़ा क्षेत्र से अपनी चुनावी राजनीति की शुरुआत की। सईद ने बाद में पीडीपी नाम से नई पार्टी का गठन किया। 

 

इसके बाद मुफ्ती मोहम्मद सईद के करीबी और पीडीपी के वरिष्ठ नेता अब्दुल रहमान भट ने 2014 तक जम्मू-कश्मीर में हुए आखिरी विधानसभा चुनाव तक बिजबिहाड़ा सीट से लगातार चार चुनाव जीते। भट को इस बार शांगस-अनंतनाग पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी ने टिकट दिया है।

 

दो हार के बाद भी नेकां को वीरी पर भरोसा
नेशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार बशीर अहमद शाह उर्फ बशीर वीरी इस निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। उनकी पूरी कोशिश है कि पीडीपी की पकड़ को यहां कमजोर कर सकें। बशीर के पिता अब्दुल गनी शाह वर्ष 1977 से 1990 तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

कश्मीर की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी ने बशीर अहमद शाह पर विश्वास जताते हुए टिकट दिया है। हालांकि इससे पहले वह दो बार हार का समाना कर चुके हैं। जब नेकां ने 2009 से 2014 तक कांग्रेस के साथ गठबंधन सरकार बनाई तो उन्हें एमएलसी बनाया गया था। इस सीट पर न केवल दो पार्टियों बल्कि शाह और मुफ्ती परिवार की भी साख टिकी है। दोनों परिवारों के बुजुर्ग भी इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

 

खाता खोलने के लिए भाजपा भी पूरी तैयारी में
बिजबिहाड़ा सीट को परिवारवाद से छुटकारा दिलाने और अपना खाता खोलने के लिए भाजपा ने भी पूरी तैयारी कर रखी है। नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के बीच तीसरे उम्मीदवार के रूप में भाजपा के सोफी मोहम्मद यूसुफ को टिकट दिया है।
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यूसुफ भाजपा का वो चेहरा हैं जो आतंकवाद के चरम में भी पार्टी के लिए डटे रहे। वो ऐसे समय में पार्टी का चेहरा बने जब आतंकियों के डर से कोई भाजपा का नाम तक नहीं लेता था। वह पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार में एमएलसी भी रहे हैं।

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