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Omar Abdullah: इस सीट को बरकरार रखेंगे उमर अब्दुल्ला... ये सीट छोड़ने की संभावना; इसलिए लिया गया फैसला

Tue, 15 Oct 2024 12:55 PM IST
शाहरुख खान अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, श्रीनगर

सार

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर जीत दर्ज करने वाले उमर अब्दुल्ला को एक सीट छोड़नी होगी। उनके गांदरबल सीट पर कब्जा बरकरार रखने और बडगाम सीट छोड़ने की संभावना है।
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Omar Abdullah - फोटो : ANI
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विस्तार
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16 अक्तूबर को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले उमर अब्दुल्ला के गांदरबल विधानसभा सीट पर कब्जा बरकरार रखने और बडगाम सीट खाली करने की संभावना है। 
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सूत्रों का कहना है कि यह फैसला इसलिए लिया गया है कि गांदरबल उमर के लिए भावनात्मक रूप से काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वही निर्वाचन क्षेत्र है जहां से राज्य में उनकी राजनीतिक यात्रा शुरू हुई थी।

इतना ही नहीं यह सीट अब्दुल्ला परिवार के लिए एक पुश्तैनी सीट भी रह चुकी है। यहां से उमर उससे पहले उनके पिता डॉ फारूक अब्दुल्ला और उससे पहले उनके दादा शेख मोहम्मद अब्दुल्ला नेतृत्व कर चुके हैं। 
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अतीत को देखें तो उस हिसाब से उमर अब्दुल्ला इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने की कोशिश करेंगे। पार्टी सूत्रों की मानें तो परिवार और पार्टी में उनके करीबी लोगों ने भी उमर को गांदरबल में कब्जा बरकरार रखने की सलाह दी है। 
 

अब देखना यह होगा कि उमर इसपर कब फैसला लेते हैं। बता दें कि 1962 में नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के अब्दुल सलाम ऐतु, 1967 और 1972 में मोहम्मद मकबूल भट (कांग्रेस), 1977 में शेख मोहम्मद अब्दुल्ला (नेकां), 1983, 1987 और 1996 में डॉ फारूक अब्दुल्ला (नेकां), 2002 में काजी मोहम्मद अफजल (पीडीपी), 2008 में उमर अब्दुल्ला (नेकां) और 2014 में इश्फाक अहमद शेख ने इस सीट से जीत हासिल की थी। 

 

2024 में एक बार फिर से नेकां के उमर अब्दुल्ला ने 10574 वोटों से जीत हासिल कर पीडीपी के बशीर अहमद मीर को हराया है, जिसे 22153 वोट हासिल हुए हैं। उमर ने कुल 32727 वोट हासिल किए थे।

फिर होगा बडगाम में उपचुनाव
इस कदम के कारण बडगाम में उपचुनाव की आवश्यकता होगी, साथ ही इस बात पर अटकलें लगाई जा रही हैं कि इस सीट पर किसे उम्मीदवार बनाया जाएगा। 

 

चूंकि उमर नई सरकार का नेतृत्व करने की तैयारी कर रहे हैं, इसलिए राजनीतिक पर्यवेक्षक इस फैसले को गांदरबल में उनकी पार्टी के मुख्य समर्थन आधार के साथ रणनीतिक संरेखण के रूप में देखते हैं।
 

फारुख अब्दुल्ला और दादा शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के घर 10 मार्च 1970 को उमर अब्दुल्ला का जन्म हुआ। राजनीतिक परिवार से संबंध होने से उमर का बचपन से ही राजनीति के प्रति झुकाव रहा था। उमर अब्दुल्ला ने 1998 में, 28 वर्ष की आयु में पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा। 

 
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12वीं लोकसभा में सबसे कम उम्र के सदस्य बने। 1998-99 में वे परिवहन और पर्यटन समिति और पर्यटन मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति दोनों के सदस्य थे। 1999 में, वे 13वीं लोकसभा के लिए चुने गए (संसद सदस्य के रूप में दूसरा कार्यकाल)। 54 साल की आयु में उमर अब्दुल्ला ने प्रदेश के 14वें और दूसरी बार मुख्यमंत्री के पद की शपथ ले रहे है।


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