कठुआ में बनने वाले हैचरी यूनिट का पोल्ट्री क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों के लिए ट्रेनिंग यूनिट के रूप में उपयोग किया जाएगा। वर्तमान में लोक निर्माण विभाग की ओर से पशुपालन विभाग के कार्यालय परिसर में इन हैचरी का काम तेजी से अंजाम दिया जा रहा है। अधिकारियों की मानें तो मार्च 2025 तक यह हैचरी और फीड मिल पूरी तरह से तैयार हो जाएंगे।
सालाना 1273 करोड़ का पोल्ट्री उत्पाद, 30 हजार मीट्रिक टन मीट का आयात जम्मू-कश्मीर में सितंबर, 2024 में 29 लाख 26 हजार से ज्यादा मुर्गे-मुर्गियां का आयात हुआ। हर महीने 30 लाख से ज्यादा अंडे जबकि सितंबर महीने में ही 1 लाख 59 हजार 42 भेड़-बकरियां भी मीट के लिए आयात की गईं। वर्ष 2023 में 1273 करोड़ के पोल्ट्री उत्पाद आयात किए गए। लगभग 70 हजार मीट्रिक टन मीट की खपत करने वाले प्रदेश में आधा हिस्सा यानी 30 हजार मीट्रिक टन प्रदेश के बाहर से आता है।
संभाग की सबसे नवीनतम तकनीक की यह बैकयार्ड हैचरी और फीड मिल क्षेत्र के युवाओं को पोल्ट्री की ओर आकर्षित करेगी। जिले में इससे तैयार होने वाले चूजों की संख्या में भी इजाफा होगा और स्वरोजगार के साधन युवाओं को हासिल होंगे। यह परियोजना 3.8 करोड़ की लागत से एचएडीपी के तहत तैयार की जा रही है।