विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। परिणाम के इंतजार की उत्सुकता जितनी है, उतनी ही दिलचस्पी इस बात को भी जानने में है कि मुख्यमंत्री कौन होगा। कारण यह है कि सभी राजनीतिक दल सीएम चेहरे के बिना ही मैदान में उतरे थे।
विज्ञापन
नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी तक ने मुख्यमंत्री चेहरे घोषित नहीं किए जबकि इनके कई नेता पूर्व में मुख्यमंत्री रह चुके हैं। भाजपा भी बिना चेहरे के मैदान में थी। यदि गठबंधन जीतता है तो सीएम चेहरे के रूप में नेकां के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला का नाम आगे होने की संभावना रहेगी।
विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उनको मनाने के पीछे भी शायद यही उद्देश्य रहा है। भाजपा सत्ता में आती है, तो चेहरा कौन होगा। यह सवाल सभी के जेहन में बना हुआ है। भाजपा की ओर से रविंद्र रैना, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का नाम राजनीतिक गलियारों में गूंज रहा है।
विज्ञापन
अगर भाजपा के पास बहुमत का आंकड़ा आता है तो यहां भी संभव है कि अन्य राज्यों की तरह वह कोई चौंकाने वाला नाम सामने ले आए। भाजपा पिछले कुछ चुनावों में प्रदर्शन के आधार पर आश्वस्त कर रही है कि वह बहुमत का आंकड़ा छू लेगी।
राजनीतिक पंडित इसे मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि प्रश्न यह है कि यदि भाजपा बहुमत का आंकड़ा नहीं छू पाती है तो वह किसके साथ गठबंधन करेगी। गठबंधन करती है तो जाहिर सी बात है कि उसे सहयोगी की बात भी माननी पड़ सकती है। ऐसे में सीएम चेहरे पर नए सिरे से पार्टी को मंथन करना पड़ सकता है।
यह सभी संभावनाएं अभी बनी हुई हैं। हालांकि भाजपा ने रविंद्र रैना को चुनाव में उतारा और उसी बीच एक कार्यकारी अध्यक्ष भी लगा दिया। भाजपा का यह कदम चर्चा में रहा क्योंकि पार्टी ने अब तक किसी राज्य में कार्यकारी अध्यक्ष का प्रयोग बीच चुनाव में नहीं किया था।
अब राजनेताओं की ओर से सोशल मीडिया पर जो पोस्ट आ रही हैं, यह इशारा कर रही हैं कि सरकार बनाने की ओर आजमाइश अभी से शुरू कर दी गई है। वीरवार और शुक्रवार को इससे जुड़ी दो पोस्ट सामने आई। एक श्रीनगर के पूर्व मेयर जुनैद मट्टू और एक पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने की। इसमें उन्होंने गठबंधन से जुड़े इशारे ही किए। फिलहाल सीएम चेहरे को लेकर हर वर्ग में चर्चाएं तेज हैं।
चिनार के अलावा कश्मीर में कुछ भी सीधा नहीं
वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा और पीडीपी ने सरकार बनाई थी। हालांकि यह गठबंधन तीन साल ही चल सका था। अब वीरवार को पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा ने एक्स पर एक पोस्ट की। उसमें लिखा कि नतीजे भले ही आठ को आएंगे, लेकिन उससे पहले ही शतरंज का खेल शुरू हो चुका है। यह सब मीडिया की चकाचौंध से दूर होगा। आगे लिखा कि कश्मीर में चिनार के पेड़ों के अलावा कुछ भी सीधा नहीं है।
वहीं श्रीनगर के पूर्व मेवर जुनैद मट्टू ने लिखा कि पहलगाम में नेकां अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला और भाजपा प्रतिनिधि के बीच दो बैठक हुई। शुक्रवार सुबह तंज कसते हुए लिखा कि यह महज संयोग ही रहा होगा कि नेकां अध्यक्ष और भाजपा प्रतिनिधि एक ही जगह पहुंच गए। इससे लोगों ने गठबंधन के कयास लगाने शुरू कर दिए। इल्तिजा की पोस्ट के बाद माना जा रहा है कि पीडीपी एक बार फिर खुद को किंगमेकर बता रही है। अलग-अलग समय पर उसने कांग्रेस और भाजपा दोनों का समर्थन किया है।
सभी पहले से जानते हैं उन्हें बहुमत नहीं मिलेगा
एक पार्टी के वरिष्ठ नेता का कहना है कि चुनाव शुरू होने से पहले ही सभी राजनीतिक दलों को पता था कि उन्हें बहुमत नहीं मिलेगा। कोई पाटों अकेले सभी सीटों पर नहीं लड़ रही है। यही कारण है कि किसी ने सीएम के बेहरे को सामने नहीं रखा बल्कि प्रचार अभियान में पूरी ताकत लगाई।
सभी बड़े नेताओं ने चुनावी रैलियां की। सभी की नजर छोटी पार्टियों की जीत पर भी है कि वह कैसे प्रदर्शन करती हैं। उनके प्रदर्शन को देखने के बाद उसी हिसाब से रणनीति बनाई जाएगी।
गठबंधन में कांग्रेस कहां होगी ?
नेकां-कांग्रेस गठबंधन में नेकां ने 51 सीटों पर चुनाव लड़ा है। ऐसे में बड़े भाई की भूमिका को उसने पहले ही साफ कर दिया है। कांग्रेस सिर्फ 31 सीटों पर चुनाव मैदान में थी। ऐसे में यह गठबंधन सत्ता में आता है तो कांग्रेस की नजर डिप्टी सीएम के पद पर रहेगी। वहीं, कांग्रेस पहले भी कई बार अधिक सीटें लेकर राज्य में कम सीटें पाने वाली पार्टियों के नेता को मुख्यमंत्री बना चुकी है।
अभी यह सवाल हर तरह से मुश्किल है कि यदि भाजपा बहुमत का आंकड़ा पा लेती है तो इस पर फैसला लेगी कि कौन सीएम होगा। यदि भाजपा बहुमत तक नहीं पहुंचती है तो फिर यह देखना होगा कि उनके साथ गठबंधन में कौन आता है और उसकी शर्ते क्या होंगी। इसके साथ ही कितने निर्दलीय जीतेंगे और वे कहां जाएंगे। इससे काफी सारे समीकरण बनेंगे।-रेखा चौधरी, राजनीतिक विश्लेषक