फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jammu News: चैंबर के अध्यक्ष के तौर पर आधी आबादी की भागीदारी शून्य

विज्ञापन
विज्ञापन
-1935 से अब तक 30 अध्यक्षों ने की नुमांइदगी, कई का कार्यकाल दो बार से अधिक रहा
विज्ञापन

- महिलाएं की केवल सदस्य के तौर पर ही रही भागीदारी

अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के चुनाव में 2800 से अधिक व्यापारी और 50 से अधिक व्यापारिक संगठनों व एसोसिएशनों के सदस्य हर दो वर्ष बाद नया अध्यक्ष चुनते हैं। इस संगठन में 1935 से अब तक यह कुर्सी पर महिलाएं काबिज नहीं हो पाई हैं। जबकि, कई लोग दो से चार बार तक अध्यक्ष बन चुके हैं।

चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष पद काफी संख्या में लोग रह चुके हैं। चैंबर की शुरुआत में वर्ष 1935 से 1950 तक दीवान इस्सार दास ओसवाल ने अध्यक्ष की कुर्सी संभाली। उसके बाद अश्वनी कुमार कपूर दो कार्यकाल 1956 से 1958 और 1969 से 70 तक अध्यक्ष रहे। कृष्णकांत को तीन बार अध्यक्ष पद संभालने का मौका मिला। वह 1970 से 71, 1975-76 तक और 1983-84 तक अध्यक्ष रहे।
विज्ञापन

व्यापारी नेता राम सहायक ने 1990-92 और 2000-2009, राकेश गुप्ता 2014-17 और 2017-21 तक अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। निवर्तमान अध्यक्ष अरुण गुप्ता ने 2012-2017 और 2021 से अब तक अध्यक्ष हैं। चुनाव की घोषणा के बाद वह फिर मैदान में हैं।

व्यापारी नेता आरएन नेता चार बार बने अध्यक्ष
राजेंद्र मोटियाल 1988-90 और 1992-94 तक अध्यक्ष रहे। सतीश गुप्ता को व्यापारियों ने 1990-92 और 1996-2000 तक अध्यक्ष बनने का मौका दिया। अरुण गुप्ता ने वर्ष 2012 से लेकर 2017 तक अध्यक्ष की कुर्सी संभाली। व्यापारी नेता आरएन चौधरी 1960-61, 1964-67, 1973-74 व 1977-78 तक चार बार अध्यक्ष रहे। इसी तरह प्यारेलाल जैन ने तीन बार 1954-56, 1959-60 और 1969-70 तक अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली है। जुगल किशोर महाजन 1984 -85 और 1979-83 तक अध्यक्ष रहे। व्यापारी नेता दयाराम गणगोत्रा भी दो बार 1974-77 और 1978-79 तक अध्यक्ष रहे।
विज्ञापन




भविष्य बदल रहा है, भविष्य में महिलाएं बन सकती हैं अध्यक्ष
पूर्व अध्यक्ष अरुण गुप्ता का कहना था कि शहर में संगठन के अंदर बड़ी संख्या में महिला सदस्य हैं। कॉरपोरेट कल्चर न होने से अध्यक्ष के तौर पर अभी तक किसी ने दावेदारी नहीं जताई है। समय बदल रहा है। भविष्य में संभव है कि कोई महिला भी अध्यक्ष बने। यह आधी आबादी की इच्छा की बात है। लोकतंत्र में उनके लिए कोई प्रतिबंध नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें