आईआईएम में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घटान के दौरान फोटो आईआईएम
आईआईएम जम्मू के निदेशक ने एनईपी के तहत स्कूलों में डोगरी को अनिवार्य विषय बनाने को कहा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। डोगरी भाषा में उच्च शिक्षा के लिए पाठ्यपुस्तकें तैयार करने के लिए अकादमिक लेखन पर लेखकों की दो दिवसीय कार्यशाला हुई। इसमें क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ्यक्रम तैयार करने, डोगरी वर्तनी के मानकीकरण सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। कार्यशाला का आयोजन भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) जम्मू ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के तत्वावधान में भारतीय भाषा समिति के सहयोग से किया था।
कार्यशाला में प्रो. एसपी बंसल, कुलपति, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय मुख्य अतिथि थे। कार्यशाला के महत्व और क्षेत्रीय भाषाओं को मजबूत करने में एनईपी की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि 22 नोडल विश्वविद्यालयों को अलग-अलग भाषाएं सौंपी गई हैं।
इसमें केंद्रीय विवि हिमाचल को डोगरी मिली है। भाषा पहचान का आधार बनती है। उच्च शिक्षा में डोगरी को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। आईआईएम जम्मू के निदेशक प्रो. बीएस सहाय ने एनईपी 2020 के अनुरूप स्कूलों में डोगरी को प्रारंभिक चरण से अनिवार्य विषय बनाने को कहा। मुख्य वक्ता पद्मश्री ललित मगोत्रा ने ज्ञान के प्रसार में मातृभाषा की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने डोगरी को प्रारंभिक शिक्षा और अकादमिक शोध में एकीकृत करने के लिए संस्थागत प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने डोगरी वर्तनी के मानकीकरण का आह्वान किया।
यूजीसी की संयुक्त सचिव डॉ. अर्चना ठाकुर ने क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने में आईआईएम जम्मू, केंद्रीय विवि हिमाचल प्रदेश, एसएमवीडीयू और जम्मू विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के प्रयासों की सराहना की।