नृसिंह मंदिर में 11 दिवसीय श्री लक्ष्मी नृसिंह महायज्ञ के तहत श्रीमद्भागवत कथा शुरू
पहले दिन कथावाचक ने श्रद्धालुओं को बताया कथा का महत्व
संवाद न्यूज एजेंसी
दोमाना। मृत्यु को जानने के बाद मन से भय मिट जाता है। इसी प्रकार श्रीमद्भागवत कथा सुनने के बाद अभय प्राप्त होता। यह कथा जीव को अभय बना देती है। यह ज्ञान महामंडलेश्वर श्रीश्री 1008 महंत नंद किशोर दास शास्त्री ने रविवार को नृसिंह मंदिर घो मन्हासा में शुरू हुई श्रीमद्भागवत कथा में दिया।
मंदिर में 11 दिवसीय श्री लक्ष्मी नृसिंह महायज्ञ जारी है। रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कथावाचक ने कथा पहले दिन भागवत कथा के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा परमात्मा का अक्षर स्वरूप है।
यह परम हंसों की संहिता है। भागवत कथा हृदय को जागृत कर मुक्ति का मार्ग दिखाता है। अधिक मास में इसके श्रवण का महत्व है। कथा भगवान के प्रति अनुराग उत्पन्न करती है। यह ग्रंथ वेद, उपनिषद का सार रूपी फल है। कथा सुनने से भक्तों में श्री कृष्ण का ज्ञान वैराग्य भक्ति स्थापित हो जाएगी।
श्रीमद्भागवत कथा गुरु-शिष्य संबंध भी है, जिसमें गुरुदेव सुखदेव महाराज अपने प्रिय शिष्य राजा परीक्षित को भगवान की कथा अमृत का पान कराते हुए उनके ह्रदय में भगवान की प्रेम भक्ति स्थापित की और उसे भगवान से मिला दिया। कथा से पहले हवन कर पूजा की गई।