ऑल इंडिया कन्फेडरेशन ऑफ एससी एसटी ओबीसी ऑर्गनाइजेशन के दलित, ओबीसी, अप्लसंख्यक संगठन (डीओएम) विंग ने मंगलवार को बिलकिस बानो दुष्कर्म मामले में दोषियों को रिहाई के खिलाफ प्रदर्शन किया। हाल ही में बिलकिस बानो सामूहिक बलात्कार मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 11 दोषी गोधरा उप-जेल से रिहा किए गए हैं। गुजरात सरकार की सजा माफी नीति के तहत उन्हें रिहा किया गया है।
इसी के विरोध में जम्मू में प्रेस क्लब के बाहर डीओएम के सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए बिलकिस बानो के लिए इंसाफ की मांग उठाई। डीओएम के चेयरपर्सन आरके कलसोत्रा ने कहा कि दोषियों को रिहा करने के फैसले की वह निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से निर्देश है कि हत्या और दुष्कर्म के दोषियों को रिहा नहीं किया जाना चाहिए, जिसका गुजरात सरकार ने सीधे-सीधे उल्लंघन किया है। बिलकिस बानो के साथ परिवार के साथ सात सदस्यों की हत्या कर दी गई। उनके साथ दुष्कर्म हुआ और उस समय वह पांच महीने की गर्भवती थी। इतने जघन्य अपराध करने के बाद भी दोषियों को रिहा कर देने का फैसला निंदनीय है। इसे जल्द से जल्द वापस लिया जाना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि गुजरात में 2002 में हुए दंगों के बाद बिलकिस बानो पर हमला किया गया था। हमले के दौरान अहमदाबाद के रंधिकपुर में रहने वाली बिलकिस बानो के परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी गई थी और उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। बिलकिस उस समय 21 साल की थी और पांच माह की गर्भवती थी।
21 जनवरी 2008 को मुंबई की एक विशेष सीबीआई कोर्ट ने बिलकिस बानो के सामूहिक बलात्कार और परिवार के सात सदस्यों के हत्या के आरोप में 11 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनकी सजा को बरकरार रखा था। इन दोषियों ने 15 साल से अधिक जेल की सजा काट ली थी, जिसके बाद उनमें से एक ने अपनी समय से पहले रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
शीर्ष अदालत ने गुजरात सरकार को उनकी सजा में छूट के मुद्दे पर गौर करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद सरकार ने एक समिति का गठन किया। समिति ने मामले के सभी 11 दोषियों को रिहा करने के पक्ष में सर्वसम्मति से फैसला लिया। राज्य सरकार को सिफारिश भेजी गई थी और इस साल 15 अगस्त को दोषियों को रिहा कर दिया गया।