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Jammu News: पहाड़ी लेखक तैयार करें सांस्कृतिक संरक्षण व गुणवत्ता वाला साहित्य

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सम्मेलन में पहाड़ी साहित्यिक कृतियों का विमोचन करते मुख्य अति​थि व अन्य फोटो सूचना विभाग
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दो दिवसीय पहाड़ी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक सम्मेलन का दूसरा दिन
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। पहाड़ी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक सम्मेलन का सोमवार का आगाज हुआ। इसका आयोजन जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी की ओर से किया गया है। इसमें प्रदेशभर के कवियों व कलाकारों ने भाग लिया। पूर्व विधायक रविंद्र रैना सम्मेलन के पहले दिन मुख्य अतिथि थे। वक्ताओं ने पहाड़ी लेखकों को सांस्कृतिक संरक्षण और उच्च गुणवत्ता वाले साहित्य तैयार करने को कहा।
सम्मेलन में पहाड़ी साहित्यिक कृतियों परवेज मानूस का उपन्यास कबीला और इकबाल शॉल का लघु कहानी संग्रह तारेरान का विमोचन किया। लेखक केडी मणि ने पहाड़ी भाषा की मान्यता के लिए पांच दशक लंबे आंदोलन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहाड़ी साहित्य का काफी विकास हुआ है और अब यह पंजाबी और डोगरी जैसी विकसित भाषाओं के बराबर खड़ा है।
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पूर्व एमएलसी एमआर कुरैशी ने विमोचित दो पुस्तकों पर चर्चा की। डीडीसी सदस्य मोहम्मद इकबाल मलिक ने युवा पीढ़ी को उनकी भाषाई और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के महत्व पर जोर दिया। मुख्य अतिथि रविंद्र रैना ने पहाड़ी भाषा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर जोर दिया। अकादमी की सचिव हरविंदर कौर ने कहा कि पहाड़ी महत्वपूर्ण भाषाओं में से एक है।
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सम्मेलन में संगीत प्रदर्शन, शोध-पत्र प्रस्तुतियां और लघु कथा वाचन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गुलजार कुरैशी, गुलाम अहमद ख्वाजा, अजय शर्मा (एसपी सिटी) मौजूद रहे।
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