फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jammu News: लोगों को भा रहा कलाड़ी कुलचा, दाल बाटी के भी हो रहे दीवाने

Tue, 25 Feb 2025 03:01 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
विज्ञापन
विज्ञापन
सरस मेले के पांचवें दिन बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने प्रादेशिक व्यंजनों का उठाया लुत्फ
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। कला केंद्र में दस दिवसीय सरस आजीविका मेला जारी है। सोमवार को पांचवें दिन बड़ी संख्या में लोगों ने मेले में पहुंचकर विभिन्न राज्यों के व्यंजनों का लुत्फ उठाया व जमकर खरीदारी की। मेले में हिमाचल के जैविक मोटे पकवान, उधमपुर का कलाड़ी कुलचा, राजस्थान का दाल बॉटी चूरमा व बिश्नाह का राजमा चावल प्रमुख आकर्षण रहा।

मेले में प्रमुख रूप से जैविक मोटे अनाज, आचार, मुरब्बा, ऊनी कपड़ों के उत्पाद सहित आर्टिफिशियल ज्वेलरी व खाद्य पदार्थों के स्टाल विभिन्न राज्यों से आई स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने लगाए हैं। इस दौरान लोगों को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेशिक संस्कृति की भी जानकारी दी जा रही है।
विज्ञापन



2017 से स्वयं सहायता समूह से जुड़कर कार्य शुरू किया। इससे जीवन में काफी बदलाव आया है और हम आार्थिक रूप से मजबूत हुए हैं। स्वयं सहायता समूह ने हर स्तर पर सहायता की। मोटे अनाज के पकवान स्टॉल पर लगाए गए हैं, जिन्हें काफी पसंद किया जा रहा है। लोगों को हिमाचल का मशहूर सिड्डू खिलाने का मौका मिल रहा है।

-रूप रशिमी, किन्नौर, हिमाचल प्रदेश

करीब छह साल से स्वयं सहायता समूह से जुड़कर कलाड़ी कुलचे का काम कर रही हूं। इसे लोग बहुत पसंद करते हैं। बहुत खुश हूं कि हमें इस समूह में काम करने का मौका मिला। महिलाओं से कहना चाहती हूं कि वह इस समूह से ज्यादा से ज्यादा जुड़कर खुद सशक्त बनने का प्रयास करें।

-पूजा शर्मा, उधमपुर, जम्मू

मैं दिव्यांग हूं। सरस मेले से महिलाओं को काफी प्रोत्साहन मिला है। एक अच्छा प्लेटफार्म व जम्मू में अपने प्रदेश के मुख्य व्यंजन दाल, बाटी चूरमा यहां के लोगों को खिलाने का मौका मिला। राजस्थानी खाना लोग खूब पसंद कर रहे हैं। सेल्फ हेल्फ ग्रुप से करीब 10 से जुड़ी हूं। अब तक दस मेलों में भाग ले चुकी हूं।
विज्ञापन

-सुनीता, राजस्थान

स्वयं सहायता समूह से जुड़े 10 साल हो गए हैं। पहले हमारे घर की स्थित सही नहीं थी, लेकिन समूह में जुड़ने से हमारे घर में खुशियां आ गई हैं। बैंक से ऋण लेकर स्वरोजगार शुरू किया। उम्मीद बिश्नाह महिला प्रगति नाम की कंपनी है। इससे करीब 300 महिलाओं को जोड़ चुकी हूं।
-ममता देवी, बिश्नाह, जम्मू
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें