समूह थियेटर की ओर से नाटक द बैचे का हुआ मंचन, खूब उमड़ी भीड़
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय थियेटर महोत्सव भारत रंग महोत्सव के 25वें संस्करण में समूह थिएटर द्वारा मंचित द बैचे नाटक का मंचन किया गया। इस रूपांतरण ने प्राचीन ग्रीक त्रासदी को समकालीन सार से भर दिया। भारत रंग महोत्सव ने नौ देशों की 200 से अधिक प्रस्तुतियों के भव्य प्रदर्शन के साथ अपने मील के पत्थर वर्ष का जश्न मनाया।
इसका मंचन भारत, नेपाल और श्रीलंका के 13 स्थानों पर किया गया। थियेटर के शौकीन लोगों की नई दिल्ली के मंडी हाउस चौराहे पर खूब भीड़ उमड़ी। इस मौके पर महोत्सव में विश्व जन रंग भी लांच किया गया।
बैचेई थेब्स शहर में घटित दैवीय प्रतिशोध और मानवीय मूर्खता की नाटकीय कहानी का वर्णन करता है। डायोनिसस, जिसे थेबंस ने ईश्वरत्व से वंचित कर दिया था, शहर की महिलाओं को पहाड़ों में उसकी पूजा के लिए प्रेरित करके अपना प्रतिशोध लेता है। कैडमस और टायर्सियस की चेतावनियों के बावजूद, थेबन शासक पेंथियस ने डायोनिसस की दिव्यता को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
पेंथियस की अपनी मां उसे शेर समझ लेती है और उसे मार देती है। डायोनिसस अपनी असली पहचान प्रकट करता है और थेब्स को उसकी अवज्ञा के लिए दंडित करता है। प्रोडक्शन के शानदार कलाकारों ने दमदार प्रदर्शन किया और किरदारों को तीव्रता और भावना के साथ जीवंत कर दिया। नाटक के कलाकारों में डायोनिसस के रूप में देवांशु रैना और अविनाश लखनोत्रा, टायर्सियस के रूप में अजय तमांग, एगेव के रूप में दीक्षा पंडिता, कैडमस के रूप में सोहम कश्यप ने किरदार निभाया।