दोमाना। पुरखु कैंप में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का समापन शनिवार को हुआ। इस दौरान हवन-यज्ञ व भंडारे का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हवन यज्ञ में आहुति डालकर प्रसाद ग्रहण किया। पुरखु के ग्रामीणों के सहयोग से श्रीमद् भागवत कथा का वाचन माता नीतू देवी ने किया। सात दिनों तक विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने सभी से भक्ति मार्ग से जुड़ने व सत्कर्म करने को कहा। सुगना बाई सा ने कहा कि हवन यज्ञ से वातावरण व वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। उन्होंने बताया कि भागवत कथा के श्रवण से मात्र से व्यक्ति भव सागर से पार हो जाता है।
भंडारे के प्रसाद का वर्णन करते हुए कहा प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला प्र का अर्थ प्रभु, दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं। मनुष्य शरीर भी भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है। संवाद