घर में उल्लास, बाजार गुलजार, घाट किनारे की व्यवस्थाएं दिन भर की जाती रहीं दुरुस्त
नहाय-खाय के साथ शुरू होगी छठ मैया की पूजा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। सूर्य उपासना का चार दिवसीय छठ पर्व मंगलवार से शुरू हो रहा है। नहाय-खाय के साथ पूजन-व्रत शुरू होगा। सोमवार को छठ पर्व मनाने वाले परिवारों में विशेष उत्साह दिखा। कहीं पूजा के सामान की खरीदारी में लोग व्यस्त रहे तो कहीं घर की साफ-सफाई कर पूजन के स्थान को व्यवस्थित किया जाता रहा। घाट किनारे छठ पूजा आयोजन करने वाली समितियां भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बंदोबस्त में जुटी रहीं।
आठ नवंबर को इसका समापन होगा।इस दौरान मंदिरों के शहर सहित आसपास के इलाकों में आठ नवंबर तक छठी मैया के गूंजेंगे। महापर्व की तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। बुधवार को दूसरे दिन शाम को व्रती गुड़ से बनी खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण कर उपवास शुरू करेंगे। वीरवार को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा और शुक्रवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही व्रत संपन्न होगा। चार दिवसीय छठ पर्व में सूर्य देव की पत्नी (ऊषा) माता छठी की पूजा की जाती है। सूर्य देवता की पूजा का महत्व पुराणों में निकलता है।
उधर, सोमवार को छठ पूजा के लिए बाजार सज गए हैं। व्रतियों ने सोमवार शाम को जमकर खरीदारी की। व्रत के लिए त्रिकुटा नगर, शास्त्री नगर डिग्याना और बाड़ी ब्राह्मणा सहित अन्य स्थानों में विशेष बाजार सजे हैं। वहीं, शहर में डिग्याना, बाड़ी ब्राह्मणा, त्रिकुटा नगर, तालाब तिल्लो, जीवन नगर, गंग्याल में नहरों के किनारों को पूजा के लिए साफ किया गया है। तवी नदी बिक्रम चौक और हर की पौड़ी में भी विशेष अभियान चलाया गया।
बाड़ी ब्राह्मणा छठ पूजा समिति के अध्यक्ष संतोष कुमार ने कहा कि व्रत के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। नहरों के किनारों पर साफ सफाई की गई है। बिहार सेवा समिति के अध्यक्ष संजय कुमार ने बताया कि शहर में अलग अलग जगहों में पूजा का आयोजन किया जाएगा।
महापर्व के चार मुख्य दिन और गतिविधियां
- पहला दिन (नहाय खाय) : मंगलवार को नहाय खाय से छठ पूजा की शुरूआत होगी। इस दिन सूर्योदय के पहले पवित्र नदियों और तालाबों में स्नान किया जाता है। इसके बाद एक समय का ही भोजन खाया जाता है। पुराणों में कद्दू खाने का महत्व बताया गया है।
- दूसरा दिन (खरना) : छठ का दूसरा दिन खरना होता है। इस दिन व्रती निराहार रहते हैं। शाम को खीर और रोटी का प्रसाद सभी को दी जाती है। इस दिन ईष्ट मित्र एवं रिश्तेदारों को न्यौता दिया जाता है।
- तीसरा दिन (पहला अर्घ्य) : छठ के तीसरे दिन को सबसे प्रमुख माना जाता है। शाम के समय भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, जिसके लिए किसी नदी अथवा तालाब के किनारे जाकर टोकरी या सूप में फल व अन्य पूजन सामग्री सजाई जाती है। समूह में भगवान सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन घरों में प्रसाद बनाया जाता है, जिसमें लड्डू अहम होता है।
- चौथा दिन (उदीयमान सूर्य को अर्घ्य) : चौथे दिन सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह अर्घ्य लगभग 36 घंटे के व्रत के बाद दिया जाता है। इसके बाद व्रती पारण करने के बाद व्रत का समापन करते हैं।