संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। मन में कसक और समाज सेवा में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई राह मुश्किल नहीं होती है।
यह कर दिखाया है उधमपुर जिले के मजालता के बट्टल निवासी मीनू पाधा ने। वह घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं और बच्चों के लिए सहारा बन चुकी हैं। इसके लिए वह पहले अधिवक्ता बनीं और फिर पीड़ितों को अधिकारों के प्रति जागरूक करना शुरू किया।
30 वर्षीय अधिवक्ता मीनू पाधा अब तक 150 मंचों के माध्यम से बीस हजार से अधिक महिलाओं और बच्चों को कानून के प्रति जागरूक कर चुकी हैं। प्रदेश के विभिन्न कॉलेज, स्कूल व अन्य संस्थानों के साथ दिल्ली में भी सेमिनार के माध्यम से अधिकारों का ज्ञान बांट रही हैं।
मीनू पाधा ने बताया कि बचपन गांव में बीता, जहां लोगों में कानून के प्रति जागरूकता बहुत कम थी। आसपास महिलाओं और बच्चों पर हो रही हिंसा को देखकर ठान लिया कि कानून कि प्रति इस वर्ग को जागरूक करुंगी।