- फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी को किया बरी
- कहा - शुरुआत से धोखाधड़ी का इरादा होने पर ही माना जाएगा दोषी
जम्मू। फास्ट ट्रैक कोर्ट, जम्मू ने दुष्कर्म के एक मामले को यह कहते हुए खारिज किया है कि यदि आपसी सहमति से लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाए जा रहे हैं, तो यह दुष्कर्म नहीं माना जाएगा। इसी के साथ कोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया।
अभिषेक हंस नाम के आरोपी पर दुष्कर्म की धाराओं में 2023 में एफआईआर दर्ज की गई थी। अभियोजन पक्ष की ओर से एक महिला ने आरोप लगाए कि उसने अभिषेक ने साथ प्रेम संबंध शुरू किए और दोनों तीन साल से ज्यादा समय तक संबंध में रहे। आरोपी ने उससे शादी करने का वादा किया था, जिसकी जानकारी उसने अपने भाई, बहन और मां को भी दी थी। वह और आरोपी एक-दूसरे के घर पर खुलेआम आते-जाते थे। इसी बीच आरोपी ने उससे शारीरिक संबंध बनाने भी शुरू किए। कुछ समय बाद जब उसने शादी के लिए जोर दिया, तो आरोपी ने इनकार कर दिया।
मामले का फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि जिस शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी, उसमें यह भी नहीं कहा गया है कि आरोपी ने यौन शोषण करने के लिए ही झूठा वादा किया था। हालांकि बाद में अपने बयान में महिला ने कहा है कि जब वह और आरोपी एक-दूसरे से प्यार करने लगे, तो आरोपी ने उसे जम्मू के गांधी नगर स्थित एक रेस्तरां में बुलाया और उससे शादी का झूठा वादा किया। यदि उसे शुरू से ही झूठे वादे का संकेत मिल गया था और उसने फिर भी आरोपी के साथ शारीरिक संबंध किए, यह समझ से परे है। एक वयस्क होने के नाते दोनों को अपने कृत्यों के बारे में पूरी जानकारी थी। इसलिए यह मामला दुष्कर्म का नहीं माना जाएगा। जेएनएफ