जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में आए तीन मामलों में सामने आई बीमा कंपनियों की लापरवाही
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। स्वास्थ्य-वाहन क्लेम और भुगतान के बाद भी पाॅलिसी बंद कर देने के तीन अलग-अलग मामलों में जिला उपभोक्ता आयोग ने सोमवार को फैसला सुनाया। आयोग ने उपभोक्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनियों को दोषी माना। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष पवन देव कोतवाल ने फैसला सुनाते हुए चार सप्ताह के भीतर जुर्माने की राशि का ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश दिया है।
बीमा कंपनी ने नहीं किया इलाज पर हुए खर्चे का भुगतान
- केस 1: इलाज पर खर्च का भुगतान नहीं, अब ब्याज सहित चुकाएं
शहर के चन्नी हिम्मत इलाके के रहने वाले इमरनदीप सिंह ने मैक्स बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ साल 2017 में शिकायत की थी। ये आरोप लगाया था कि बीमा कंपनी ने इलाज पर खर्च हुए 1.74 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया। कंपनी ने पॉलिसी को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि पॉलिसी के लिए आवेदन करते समय इमरनदीप ने पहले से मौजूद बीमारियों का खुलासा नहीं किया था। उपभोक्ता आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी ने पॉलिसी अवैध आधार पर रद्द की है। बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि चार हफ्तों के भीतर इमरनदीप को 1.74 लाख रुपए का भुगतान साल 2017 से अब तक 7 फीसदी प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ करे। साथ ही मुकदमे पर हुए खर्च के एवज में 5000 रुपए की राशि भी अदा करे।
- केस 2 : प्रीमियम चुकाने पर भी रद्द की पॉलिसी, अब करें भुगतान
शहर के रूपनगर की आजाद कॉलोनी में रहने वाली किरण कुमारी खजुरिया ने 2015 में आयोग में वाद दायर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी पॉलिसी के प्रीमियम का भुगतान बिरला सम लाइफ इंश्योरेंस कंपनी की अधिकृत कंपनी बजाज कैपिटल इंश्योरेंस ब्रोकिंग लिमिटेड को कर दिया था। इसके बाद भी बिरला सम लाइफ इंश्योरेंस ने उनकी पॉलिसी समाप्त कर दी। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी दोषी पाई गई। मामले में आयोग ने बीमा कंपनी को 74,992 रूपये की राशि का भुगतान साल 2015 से अब तक 7 फीसदी प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ किरण कुमारी को करने का आदेश दिया है। साथ ही मुकदमे में खर्च हुए रुपयों के एवज में 5000 रुपये की राशि चार हफ्तों के साथ अदा करने का आदेश किया है।
- केस 3 : दुर्घटना बीमा की सूचना देरी को नकारा, उपभोक्ता के पक्ष में फैसला
शहर के ग्रेटर कैलाश निवासी इकबाल सिंह साल ने साल 2017 में यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई थी। इकबाल सिंह की शिकायत थी कि बीमा कंपनी ने उनकी कार का एक्सीडेंट होने के बाद क्लेम की राशि देने के से मना कर दिया। बीमा कंपनी ने दलील दी कि इकबाल सिंह ने कार के एक्सीडेंट की सूचना बीमा कंपनी को देरी से दी है। उपभोक्ता आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के दावे को अवैध घोषित करते हुए इकबाल सिंह के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग ने बीमा कंपनी को चार हफ्तों के भीतर इकबाल सिंह को 1.77 लाख रुपये की राशि का भुगतान साल 2017 से अब तक 7.5 फीसदी प्रति वर्ष की दर से ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश सुनाया है।