संघर्ष विराम की घोषणा के बाद शहवासियों ने दी प्रतिक्रियाएं, कहा-जंग किसी मसले का हल नहीं, लेकिन जवाब देना भी जरूरी था
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम की घोषणा के बाद जम्मू में लोगों की प्रतिक्रियाएं बंटी हुई नजर आईं। किसी ने सरकार के फैसले को सही ठहराया तो कुछ ने इसे अधूरा जवाब बताया। घोषणा के बाद बाजारों में दुकानें तो बंद ही रहीं, लेकिन चौक-चौराहों पर लोगों का जुटना शुरू हो गया। हर कोई सीजफायर और कल रात के हमले की चर्चा ही करता नजर आया।
शहर के ज्यूल चौक पर मिले रिटायर्ड बीमा कर्मी राजकुमार ने बताया कि सरकार का यह फैसला अच्छा है। जंग से दोनों देशों का नुकसान ही हुआ। जंग आगे बढ़ती तो और भी नुकसान होता। ये खुशी की बात है कि फैसला सही समय पर हुआ है। सभी लोग शांति ही चाहते हैं। पाकिस्तान के आम लोग भी शांति ही चाहते हैं। हालांकि, पाकिस्तान का कोई भरोसा नहीं है, लेकिन शांति के लिए भरोसा करना पड़ेगा।
थोड़ा आगे चलने पर रघुनाथ मंदिर से पास कुछ व्यापारी चर्चा करते मिले। हमने बात की तो रघुनाथ मंदिर बाजार एसोसिएशन के प्रधान गुलशन महाजन ने बताया कि पाकिस्तान को सबक सिखाना था, वह हो गया। पाकिस्तान को पता लगना जरूरी था कि भारत क्या है। सरकार ने संघर्ष विराम की घोषणा की है, तो हमारे भले के लिए सोचकर ही की होगी। जंग किसी भी देश के लिए अच्छी नहीं होती। पाकिस्तान को जितनी मार पड़नी थी, वह पड़ गई।
-
कितनी भी कोशिश कर लें, पाकिस्तान कभी अपना नहीं होगा
शहर के पुरानी मंडी चौक पर भी कुछ लोग खड़े मिले। ज्यादातर व्यापारी वर्ग के ही थे। सीजफायर की घोषणा पर बात की तो अमन महाजन ने बताया कि देश का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान को सबक सिखाना और उसकी औकात दिखाना था। जो गीदड़भभकी पाकिस्तान हमेशा देता था, उसे पता लग गया कि उसमें कितनी ताकत है। हालांकि जंग किसी भी मसले का हल नहीं है। अंत में बता करने के लिए टेबल पर बैठना ही पड़ता है। इसलिए अब जो भी हुआ, ठीक है। अमन के बगल में ही खड़े कुशल कुमार उनसे असहमत नजर आए। 1965 और 1971 की जंग देख चुके कुशल ने बताया कि जो भी हुआ, यह नहीं होना चाहिए था। मेरा यह सुनके मन खराब हो गया। आज की रात ही तो असली घमासान होने वाला था। पाकिस्तान सुधरेगा नहीं। कितनी भी कोशिश कर लें, यह कभी अपना नहीं होगा।