10 वर्ष में 11572 बार किया संघर्ष विराम का उल्लंघन, 122 नागरिकों की जान ली और 118 सुरक्षाकर्मी बलिदान हुए
अजय मीनिया
जम्मू। भारत-पाकिस्तान में तनाव के बीच बेशक संघर्ष विराम हो गया है, लेकिन विश्वास नहीं किया जा सकता है। पाकिस्तान इसे तोड़ने का आदि है। सीमा सुरक्षा बल के सेवानिवृत्त अधिकारी ने बताया कि पड़ोसी मुल्क पर विश्वास नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान ने हर बार भरोसा तोड़ा है। संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है। ये उल्लंघन आज से नहीं, बल्कि एक दशक से किया जा रहा है।
2010 से लेकर 2021 तक कई बार संघर्ष विराम का फैसला हुआ है, लेकिन हर बार स्थिति वैसी ही रही। जानकर हैरानी होगी कि 2010 से लेकर 2020 तक पाकिस्तान ने 11572 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है। इसमें 122 सीमांत नागरिकों की मौत के साथ ही 118 सुरक्षा कर्मी बलिदान हुए। इसके अलावा 594 सुरक्षाकर्मी और 673 नागरिक की घायल हुए।
सीमा सुरक्षा बल के जम्मू सेक्टर में सेवा दे चुके पूर्व आईजी राकेश शर्मा का बताया कि पाकिस्तान पर कभी भी भरोसा नहीं किया जा सकता। जब-जब सीजफायर हुआ है, तब-तब पाकिस्तान ने विश्वासघात किया है। इसलिए सीमा सुरक्षा बल को सतर्क रहना चाहिए। संघर्ष विराम की आड़ में आतंकियों की घुसपैठ भी करवाई है। इसलिए सतर्कता बरतनी की जरूरत है।
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नियंत्रण रेखा पर चार सालों में 800 बार संघर्ष विराम तोड़ा
बताते चलें कि 2021 में नियंत्रण रेखा पर भी सीजफायर हुआ था। इसके बावजूद पाकिस्तान सेना ने राजौरी, पुंछ, कुपवाड़ा और बारामुला में नियंत्रण रेखा पर हर वर्ष संघर्ष विराम तोड़ा। चार वर्षों में नियंत्रण रेखा पर 800 से अधिक बार संघर्ष विराम तोड़ा है। इसमें 90 लोगों की मौत और 50 से ज्यादा जवान बलिदान हुए हैं।