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बिना छुट्टी लिए रिसर्च भी शिक्षण अनुभव माना जाएगा : कैट

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कहा, चयन में अनुभव या उच्च योग्यता में से एक को सही तरीके से गिना जाना चाहिए
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याचिकाकर्ता को असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति देने का आदेश

अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने एक फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर कोई उम्मीदवार बिना किसी छुट्टी लिए रिसर्च करते हुए शिक्षण कार्य भी करता है, तो उस दौरान का अनुभव भी ‘शिक्षण अनुभव’ माना जाएगा।
साथ ही कैट ने यह भी साफ किया कि असिस्टेंट प्रोफेसर के चयन में अनुभव और उच्च योग्यता (जैसे पीएचडी) में से किसी एक का सही तरीके से मूल्यांकन किया जाना चाहिए न कि मनमाने तरीके से किसी एक को नजरअंदाज किया जाए।
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मामला असिस्टेंट प्रोफेसर (बॉटनी) के पद से जुड़ा है, जिसके लिए एक उम्मीदवार ने 2017 में जारी भर्ती विज्ञापन के तहत आवेदन किया था। हालांकि, शुरू में उसे इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट नहीं किया गया। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर उसे इंटरव्यू में शामिल किया गया, जहां उसने टॉप किया। इसके बावजूद उसे शिक्षण अनुभव के अंक नहीं दिए गए थे, क्योंकि लोक सेवा आयोग ने रिसर्च के दौरान के अनुभव को नहीं माना।
कैट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जब भर्ती विज्ञापन में यह कहा गया था कि चयन प्रक्रिया संशोधित नियमों और यूजीसी के दिशा निर्देशों के अनुसार होगी, तो फिर 2018 में आए यूजीसी के नए नियमों को भी लागू किया जाना चाहिए था। इन नियमों के मुताबिक रिसर्च करते वक्त बिना छुट्टी लिए किया गया शिक्षण कार्य अनुभव के तौर पर गिना जाएगा।
कैट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ है। चयन के लिए बनाए गए नियमों के तहत अनुभव और उच्च योग्यता दोनों में से एक को सही तरीके से अंक देने का प्रावधान था, लेकिन इस मामले में उसे सही तरीके से लागू नहीं किया गया।
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इसी के साथ कैट ने याचिकाकर्ता को छह हफ्तों में असिस्टेंट प्रोफेसर (बॉटनी) पद पर नियुक्त करने का निर्देश दिया। साथ ही, उसे बाकी चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति तिथि से ‘नोटशनल’ लाभ मिलेगा, जबकि वेतन वास्तविक ज्वाइनिंग के बाद मिलेगी।
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