ब्लास्ट के बाद जम्मू बस स्टैंड
- फोटो : फाइल
जम्मू बस स्टैंड पर ग्रेनेड फेंकने वाला यासिर जावेद भट्ट एक साल से हिजबुल मुजाहिद्दीन से जुड़ा हुआ है। यासिर ने हिजबुल के कई आतंकियों के लिए बैंकों में पैसों का लेन-देन किया है।
कई बार आतंकियों के लिए ग्रेनेड सप्लाई करने और हथियार सप्लाई करने का काम किया है। एक तरह से वह हिजबुल के साथ ट्रेनिंग पीरियड पर था। यह जानकारी यासिर ने पुलिस की पूछताछ में दी।
उसने यह भी बताया कि कुलगाम से ग्रेनेड को बिरयानी के टिफन में पैक करके लाया था, ताकि किसी को पता न चल सके। तीन दिन पहले उसने कुलगाम के जिला कमांडर फारूक अहमद भट्ट से कहा कि वह अब कुछ बड़ा करना चाहता है। वह कई दिनों से एक पोस्टमैन की तरह काम कर रहा है, लेकिन अब वह तंजीम ज्वाइन करना चाहता है। अब मुजाहिद बनना है। कब तक यूं काम करता रहेगा। अब बंदूक सौंपी जाए।
यासिर के लिए यह वारदात छोटा-मोटा काम
यासिर ने कहा- ‘बंदूक मांगने पर फारूक ने यासिर से कहा कि पहले कोई छोटा-मोटा हमला करके बताओ। पता तो चले कि तुम कुछ कर भी सकते हो या नहीं। जाओ जम्मू में ग्रेनेड से हमला करके आओ। मैंने कहा कि इसमें कौन-सी बड़ी बात है। इसलिए मैं यह छोटा-सा काम करने आ गया।’ युवाओं का दिमाग किस तरह मांजा जा रहा है, इसका अंदाजा यासिर की इस बात से ही लगाया जाता है कि उसके फेंके गए ग्रेनेड में दो लोगों की मौत हो गई और 33 लोग घायल हो गए। लेकिन यासिर के लिए यह छोटा-सा काम है।
ग्रेनेड की क्या ट्रेनिंग, बस पिन निकालो और फेंक दो
यासिर से जब पूछा गया कि क्या उसने ग्रेनेड फेंकने की कोई ट्रेनिंग ली है? इस पर उसने तपाक से जवाब दिया कि इसकी क्या ट्रेनिंग लेनी है, बस पिन निकालो और फेंक दो। मैंने अपने पास कई बार ग्रेनेड रखे हुए हैं।
10 सेकेंड में फटने वाला ग्रेनेड इस्तेमाल
सूत्रों का कहना है कि यासिर ने जिस ग्रेनेड का इस्तेमाल किया है, वह लो इंटेंसिटी का चाइनीज था। इसकी पिन निकालने के बाद 10 सेकेंड में ही फट जाता है। अधिक इंटेंसिटी वाला ग्रेनेड पिन निकलने के 14 सेकेंड के बाद फटता है। यासिर ने जानबूझ कर 10 सेंकेंड वाला ग्रेनेड लाया था। ताकि यह जल्दी फट जाए।