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J&K: तीन साल तक सरकारी शिक्षक बनकर आरिफ रचता रहा आतंकी साजिश, पुलिस ने इस तरह किया गिरफ्तार

Fri, 03 Feb 2023 12:48 AM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

आतंकी आरिफ अहमद इतना शातिर था कि हमले को अंजाम देने के बाद तमाम सबूत बड़ी ही होशियारी से मिटा देता था। इसकी वजह से इस तक पहुंचा नहीं जाता था।
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आतंकी आरिफ और उससे बरामद आईईडी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जम्मू शहर के नरवाल में दो धमाकों को सुलझाने के लिए पुलिस ने पहली बार उन अफसरों की मदद ली, जिन्होंने आतंकवाद के दौर में काम किया था। 1990 के दशक में कई पुलिस अफसरों ने रियासी और उधमपुर जैसे इलाकों में आतंकवाद खत्म करने के लिए बड़ा काम किया था। पुलिस ने कुछ रिटायर अफसरों और कुछ पुराने अफसरों की मदद ली और इनके जरिए आरिफ तक पहुंचे। 

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आतंकी आरिफ अहमद इतना शातिर था कि हमले को अंजाम देने के बाद तमाम सबूत बड़ी ही होशियारी से मिटा देता था। इसकी वजह से इस तक पहुंचा नहीं जाता था। कटड़ा बस में धमाका होने के बाद पुलिस को कोई लीड नहीं मिल रही थी। न ही शास्त्री नगर में मिली आईईडी की, लेकिन नरवाल धमाकों के बाद पुलिस ने विशेषज्ञ अफसरों की मदद ली और इससे इनको लीड मिली। इसके बाद जाकर आरिफ को दबोचा गया।


तालिब हुसैन भी था संपर्क में

रियासी में पिछले साल पुलिस ने राजोरी के रहने वाले तालिब हुसैन को पकड़ा था, जिसने राजोरी में आईईडी और टारगेट किलिंग की पांच वारदातों को अंजाम दिया था। बताया जा रहा है कि तालिब भी आरिफ के संपर्क में था।
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सुंजवां में बना रखा था ठिकाना

सूत्रों का कहना है कि आतंकी आरिफ ने सुंजवां में एक जगह पर अपना ठिकाना बना रखा था। वहां पर इसने आईईडी छुपाकर रखी हुई थी। मौका मिलते ही वह जम्मू में किसी और बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था।

ऐसे शिक्षक बच्चों को क्या शिक्षा देंगे

नरवाल धमाकों में घायल हुए लोगों में झिड़ी के रहने वाले विश्व प्रताप ने कहा कि वह नरवाल में डेंटिंग पेंटिंग का काम करता है। अभी दुकान खोली ही थी कि धमाका हुआ और वह इसकी चपेट में आ गया। विश्व का कहना है कि ऐसे शिक्षक दूसरों को क्या शिक्षा देंगे जो निर्दोष लोगों की जान लेते हैं। आरएस पुरा का रहने वाला अभिषेक भी हमले में घायल हुआ था। अभिषेक का कहना है कि अभी तक उसके कानों में धमाकों की गूंज है। अब भी वह उस टाइम को याद कर खौफ में आ जाता है।

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