जम्मू। हाईकोर्ट परिसर में बहुमंजिला इमारत बना कर सभी अदालतें एक ही छत के नीचे चलाने की मांग को लेकर वकीलों के जम्मू बंद का शहर में व्यापक असर दिखा है। शहर के कुछ सार्वजनिक स्थलों को छोड़ कर सभी बाजार पूर्णतया बंद रहे। इस कारण लोग जरूरत का सामान नहीं ले पाए। कई जगह दुकानदार बाजारों में तो पहुंचे लेकिन बंद की जानकारी मिलने के बाद दुकानें नहीं खोली गईं। कई जगह खुली दुकानों को वकीलों ने बंद करवा दिया।
उधर, ट्रांसपोर्टरों ने बंद का समर्थन नहीं किया था, जिस कारण बस और मेटाडोर रुटीन में चलीं। लेकिन डोगरा चौक पर एक मेटाडोर के शीशे टूटने पर ट्रांसपोर्टर और वकील आमने-सामने आए गए हैं। ट्रांसपोर्टरों ने मेटाडोर के शीशे तोड़ने का आरोप लगाया है, जबकि वकीलों ने इसे नकार दिया है। उनका कहना है कि सुरक्षा पुलिस का काम है। अगर ऐसा हुआ है तो पुलिस पता लगाए कि ये घटना कैसे हुई है। वकीलों ने जानीपुर में टायर जला कर आवाज बुलंद की और कुछ समय के लिए तवी पुल जाम कर नारेबाजी की। दोपहर के बाद मेटाडोर कम चलने के कारण यात्रियों को परेशान होना पड़ा है। खास कर रेलवे स्टेशन सहित बाहु फोर्ट, छन्नी हिम्मत और सुंजवां रूट पर यात्रियों को काफी दिक्कत हुई। बहरहाल, बार एसोसिएशन ने जम्मू बंद के लिए समर्थन देने के लिए तमाम संगठनों का आभार जताया है।
मेटाडोर के शीशे किसने तोड़े, पुलिस देखे
वकीलों की ओर से पूरे शहर में शांतिपूर्वक बंद किया गया है। तमाम संगठनों और बाजार एसोसिएशन ने उन्हें समर्थन दिया। वकीलों की ओर से कहीं पर तोड़फोड़ नहीं की गई। किसी मेटाडोर के शीशे नहीं तोड़े गए। यह किसने किया इसकी जिम्मेदारी पुलिस की है। पुलिस पहचान करे कि मेटाडोर के शीशे किसने तोड़े हैं। किसी वकील ने ऐसा नहीं किया गया है।
- सुरजीत सिंह, महासचिव, बार एसोसिएशन
वकीलों ने तोड़े शीशे, लेकिन हम करेंगे भरपाई
हमनें पहले ही घोषणा कर दी थी कि ट्रांसपोर्टर बंद को समर्थन नहीं देंगे। ट्रांसपोर्टर पहले से ही कोविड के चलते नुकसान में हैं। बार की तरफ से बंद का समर्थन करने के लिए कहा गया था, जोकि संभव नहीं था। फिर ऐसे में जबरदस्ती वाहनों को रोकना और तोड़फोड़ करना गलत है। वकील समुदाय शिक्षित तबका है। उम्मीद नहीं थी कि तोड़फोड़ करेंगे। हमारी सेंट्रल बाडी है। इसके फंड से नुकसान की भरपाई करेंगे। हमारी मांगों के समय तो चैंबर भी पीछे हट जाता है। बार एसोसिएशन भी समर्थन नहीं देती है।
- विजय चिब, प्रधान, ट्रांसपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन
सुबह सरपट दौड़ीं मेटाडोर, फिर धीरे-धीरे आई कमी
सुबह शहर और आसपास के क्षेत्रों में रूटीन की तरह बस और मेटाडोर चलीं। लेकिन डोगरा चौक पर एक मेटाडोर के शीशे टूटे उसके बाद उनकी संख्या कमी आती गई। उक्त मेटाडोर के चालक का कहना है कि कुछ लोग आए और मेटाडोर को रोक दिया। साथ ही डंडा मारकर शीशा तोड़ दिया। इसके बाद जानीपुर रोड पर चलने वाली मेटाडोर एक तरह से बंद हो गई। जानीपुर चौक से व्यावसायिक वाहनों को वापस भेजा गया।
कई जगहों पर जबरदस्ती बंद करवाया
वकीलों की कई टोलियां टाटा मोबाइल वाहन में माइक लेकर शहर में घूमती रहीं। इसइ दौरान माइक से दुकानदारों और ऑटो, मेटाडोर, व्यावसायिक वाहन चालकों को जम्मू बंद के बारे में बताया गया। अखनूर रोड पर स्थित कई स्थानों पर वकीलों ने दुकानों को जबरन बंद करवाया।
येे हैं वकीलों की मांगें
केेंद्रीय प्रशासनिक प्राधिकरण, ऋण संबंधित मामलों की सुनवाई चंडीगढ़ प्राधिकरण की जगह जम्मू में, अर्धसैनिक बलों के मामले, विशेष मामलों, उपभोक्ता अदालत, पंजीकरण कार्य और अन्य न्यायायिक कार्य एक ही जगह होने चाहिए। हाईकोर्ट में एक बहुमंजिला इमारत बना कर सभी अदालतें यहीं चलाई जाएं। बार एसोसिएशन के महासचिव सुुरजीत सिंह का कहना है कि जम्मू बंद पूरी तरह से सफल रहा है। आगे की रणनीति मंगलवार को हाईकोर्ट में होने वाली बैठक तय की जाएगी। फिलहाल कामकाज ठप रहेगा।
वकीलों के समर्थन में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर लटके ताले
वकीलों के जम्मू बंद के समर्थन में चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के बैनर तले शहर के अधिकांश व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। पुराने शहर और आसपास के इलाकों में बंद का अधिक असर दिखा। प्रदेश की सबसे बड़ी अनाज मंडी वेयर हाउस भी बंद रही। रघुनाथ बाजार, रेजीडेंसी रोड, कर्ण मार्केट, सिटी चौक, शालामार, पुरानी मंडी, लिंक रोड, जैन बाजार, चौक चबूतरा, मोती बाजार, पक्का डंगा, राज तिलक रोड, परेड, ज्यूल, तालाब तिल्लो, जानीपुर, गांधीनगर, शास्त्रीनगर आदि इलाकों में व्यापारी प्रतिष्ठान बंद रहे। चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष अरुण गुप्ता ने कहा कि बंद को समर्थन दिया था और यह सफल रहा है। ट्रेडर्स फेडरेशन वेयर हाउस नेहरु मार्केट के प्रधान दीपक गुप्ता ने कहा कि जम्मू के हितों के लिए कारोबारी हमेशा साथ खड़े रहे हैं।
आम दिनों के मुकाबले कम चलीं रेलवे स्टेशन और बाहुफोर्ट रुट पर मेटाडोर
बंद के चलते सामान्य दिनों के मुकाबले मेटाडोर की संख्या काफी रही है। रेलवे स्टेशन, बाहु फोर्ट, छन्नी हिम्मत और सुंजवां रुट्स पर मेटाडोर कम चलीं। इस कारण लोग समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाए। छन्नी हिम्मत से पंजतर्थी जाने वाले मेटाडोर को वकीलों ने बिक्रम चौक से आगे जाने नहीं दिया। रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्री सोहन लाल, विक्रम कुमार और सूरज सिंह ने कहा कि समय पर मेटाडोर नहीं मिली इस लिए ऑटो से स्टेशन जा रहे है। ट्रेन छूटना का डर है, इस लिए ऐसा करना पड़ रहा है। छन्नी हिम्मत जाने वाले साहिल वर्मा ने कहा कि आम दिनों के मुकाबले रुट पर मेटाडोर की संख्या काफी कम है। मिनी बस यूनियन के प्रधान विजय चिब ने कहा कि हमारी कुछ गाड़ियों में तोड़फोड़ की है। हमने पहले ही कहा था की हम बंद का समर्थन नहीं करेंगे।