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जम्मू-कश्मीरः ऐसे टूटेगा शिक्षकों का भूमाफियाओं-पूर्व राजनेताओं से गठजोड़, शिक्षा विभाग ने दिए संकेत

Thu, 23 Apr 2020 01:36 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pexels.com
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प्रदेश में जम्मू और श्रीनगर के हायर सेकेंडरी स्कूलों में अरसे से जमे शिक्षकों और अधिकारियों के अब ग्रामीण इलाकों में तबादले होंगे। सरकार ने ऐसे मुलाजिमों को चिह्नित कर लिया है, जो न सिर्फ दो वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं बल्कि कई मामलों में तो एक दशक से भी ज्यादा समय से इन शहर से बाहर ट्रांसफर नहीं हुए हैं। शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. असगर हसन सामून ने ट्वीट कर इस बाबत सरकार की मंशा भी व्यक्त कर दी है।

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डॉ. सामून ने तल्ख शब्दों में लिखा है कि कुछ सरकारी मुलाजिमों ने पूर्व राजनेताओं के रसूख का इस्तेमाल करते हुए जम्मू और श्रीनगर शहर के हायर सेकेंडरी स्कूलों में एक दशक तक ओवरस्टे कर लिया है। ये लोग प्राइवेट ट्यूशन समेत अपने कई साइड बिजनेस चला रहे हैं। ऐसे मुलाजिमों को फौरन ट्रांसफर किया जाना चाहिए। ये लोग एक ऐसा गठजोड़ बनाकर बैठे हैं, जिसके तार भूमाफिया से भी जुड़ हुए हैं। ऐसे मुलाजिमों को ग्रामीण इलाकों में सेवाओं का अवसर दिया जाना चाहिए।

निजी ट्यूशन नहीं ले सकते सरकारी शिक्षक

डॉ. सामून ने बुधवार को एक अन्य ट्वीट में राइट टू एजूकेशन का हवाला देते हुए सरकारी शिक्षकों की निजी ट्यूशन पर भी पाबंदी पर जोर दिया। उन्होंने लिखा ‘राइट टू एजूकेशन के तहत प्राथमिक शिक्षा में कोई फीस नहीं है। किसी भी शिक्षक को गैर शिक्षण कार्य में न लगाए जाए।

सरकारी शिक्षक निजी ट्यूशन नहीं दे सकते। प्राइवेट स्कूल कैपिटेशन फीस नहीं वसूल सकते। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए निजी स्कूलों में दाखिले का कोटा सुनिश्चित किया जाए। इसे सख्ती से अमल के लिए अधिसूचित किया जा रहा है।’

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गांवों में पद खाली, शहर में जरूरत से ज्यादा

ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में शिक्षक, मास्टरग्रेड और लेक्चररों के पद रिक्त पड़े हैं वहीं शहरों में यह अमला सरप्लस है। जम्मू शहर में ही 334 शिक्षक अधिक हैं। ये शिक्षक राजनीतिक रसूख से कई वर्षों से यहीं जमे हुए हैं। कई स्कूल ऐसे भी हैं जहां 15 से 20 शिक्षक सरपल्स हैं।

वहीं, ग्रामीण इलाकों में प्राइमरी स्कूलों में औसतन दो-दो, मिडिल स्कूलों में 3 से 4 और हायर सेकेंडरी स्कूल में 8 से 10 अध्यापक ही सेवाएं दे रहे हैं। कुछ स्कूल तो एक ही शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। शहर के सरप्लस शिक्षकों को कई बार ग्रामीण इलाकों में भेजने के आदेश पहले भी हो चुके हैं।
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