चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) राजोेरी ने रियासी जिले के एक नाबालिग लड़के को एक होटल से मुक्त कराया है। जो राजोरी शहर में पिता द्वारा बालश्रम में लगाया गया था। उसे रियासी में सीडब्ल्यूसी केंद्र में मां के हवाले कर दिया गया है।
इस संबंध में सीडब्ल्यूसी रियासी से एक सूचना प्राप्त हुई कि 11 वर्षीय लड़के को कथित तौर पर उसके पिता ने राजोेरी के एक होटल में बालश्रम में लगाया गया है। राजोरी सीडब्ल्यूसी के अधिकारी हरकत में आ गए, और एक हफ्ते के समय में लड़के का पता लगा लिया और रियासी में उसे मां के हवाले कर दिया।
जानकारी के अनुसार लड़के के माता-पिता लगभग 10 साल पहले अलग हो गए थे, और दो नाबालिग बच्चे पिता के पास रहे, जिनकी देखभाल मुश्किल थी। आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पिता लड़के को होटल या घरेलू सहायक के रूप में काम पर भेजता था।
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इस बार उसने तीन हजार रुपये प्रति माह पर राजोरी में एक होटल मालिक पर नौकर रखा। बालश्रम अधिनियम के परिणामों से अवगत होने के कारण होटल मालिक ने लड़के को अपने बच्चों के साथ घर पर रखा। मां को सूचना मिलने के बाद कि उनका बेटा एक होटल में काम करता है, उसने जून में रियासी में सीडब्ल्यूसी अधिकारियों से संपर्क किया।
सीडब्ल्यूसी ने किशोर न्याय अधिनियम 2015 के तहत मामले का संज्ञान लेने के लिए राजोरी में सीडब्ल्यूसी अधिकारियों से संपर्क किया। जहां पहले मां का पता लगाया और पूछताछ की जो वास्तविक पाई गई।
राजोरी सीडब्ल्यूसी प्रभारी अध्यक्ष अनुराधा शर्मा ने कहा कि लड़के की मां से संपर्क किया गया, जिसने खुलासा किया कि उसका पूर्व पति अलग-अलग जगहों पर लड़के को नियमित रूप से काम पर भेज रहा है। मामले को किशोर न्याय अधिनियम के मानदंडों के अनुसार पुलिस की मदद से लड़के का पता लगाया गया। होटल मालिक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।