घाटी में आतंकियों और उनकी गतिविधियों पर लगातार बढ़ते दबाव के चलते वह बौखला गए हैं। आतंकी नई साजिश के तहत उन सुरक्षाकर्मियों को निशाना बना रहे हैं जो कोरोना की अतिरिक्त ड्यूटी पर तैनात किए जा रहे हैं। पिछले दो दिनों के भीतर यह ऐसा ही दूसरा हमला है। इससे पहले आतंकियों ने शोपियां में कोरोना ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों को निशाना बनाने की कोशिश की थी।
पुलिस के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि आतंकियों के लिए कोविड ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाना आसान होता है। इसलिए वह अपनी मौजूदगी को दर्ज कराने और सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से हमला करते हैं। शनिवार को सोपोर में आतंकियों ने जिस पुलिस की जिप्सी को निशाना बनाया वह इलाके में कोरोना की एसओपी को लेकर एलान कर रही थी।
पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने भी कहा कि कोरोना के बीच आतंकियों पर लगातार दबाव बरकरार है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस की जिम्मेदारियां ऐसी हैं जिनके चलते खतरे में रह करके काम करना पड़ता है। बीच में ऐसी घटनाएं पेश आती हैं। सुरक्षा एजेंसियों का आतंकियों के ऊपर लगातार दबाव के कारण उनमें आई बौखलाहट के चलते वह ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।
सोपोर की घटना से पहले 11 जून को दो बाइक सवार आतंकियों ने जिले के अगलर इलाके में सीआरपीएफ की 178 बटालियन और जम्मू कश्मीर पुलिस का एक संयुक्त नाके पर हमला किया था। राहत की बात यह रही कि इस हमले में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ।
शनिवार को सोपोर में दूसरा बड़ा हमला किया गया इससे पहले आतंकियों ने 29 मार्च को म्यूनिसिपल कार्यालय पर हमले को अंजाम दिया था। इसमें भाजपा के पार्षद रियाज अहमद और शम्सउद्दीन और एसपीओ शफत अहमद शहीद हो गए थे। उस समय पुलिस ने खुलासा किया था कि इस हमले का मास्टरमाइंड मुदस्सिर पंडित था।