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चुनाव से पहले फिर उछला रुबिया सईद अपहरण का मुद्दा

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पूर्व अलगाववादी नेता और पीपीपी पार्टी के अध्यक्ष रहे हिलाल वार की किताब "The Great Disclosures- Secrets Unmasked" ने चुनावों से पहले पूर्व केन्द्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद के अपहरण कांड के मुद्दे को फिर हवा दे दी है।
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मीडिया में हिलाल वार के बयानों और उनकी किताबों के कुछ अंशों के छपने के बाद पीडीपी नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद पर जानबूझकर अपनी बेटी के अपहरण का षडयंत्र रचने का आरोप लगाया गया है।

हालांकि पूर्व में मुफ्ती मोहम्मद सईद और उनकी पार्टी इन आरोपों से पूरी तरह इंकार करते रहे हैं। लेकिन हाल के दिनों में मीडिया के सामने इस किताब के अंशों के आने से प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी की मुश्किलें जरूर बढ़ गई हैं।
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अपहरण कांड के बाद ही घाटी में पनपा आतंकवाद

ऐसे में यह सवाल भी प्रमुखता से खड़ा हो गया है कि कहीं रियासत में होने वाले चुनावों से पूर्व जानबूझकर इस मुद्दे को तो हवा नहीं दी गई। जानकारों की मानें तो पूर्व में भी हिलाल वार की किताब ''द ग्रेट डिस्‍क्लोजरः ‌सीक्रेट अनमास्‍क्ड'' काफी हंगामा बरपा चुकी है।

किताब में कश्मीर समस्या और यहां आतकंवाद पनपने के लिए तत्कालीन केन्द्रीय गृहमंत्री और पीडीपी नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद को जिम्मेदार ठहराया गया था। हिलाल वार ने बकायदा सिलसिलेवार मुफ्ती सईद की डाक्टर बेटी रुबिया सईद के कथित अपहरण और उससे जुड़े मुद्दों पर प्रकाश डाला है।

किताब में प्रमुख अलगाववादी नेता और भारत विरोधी रुख के लिए प्रसिद्ध जेकेएलएफ नेता यासीन मलिक और तत्कालीन पुलिस प्रमुख पर भी अपहरण का झूठा षडयंत्र रचने का आरोप लगाया गया है।
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जानबूझकर तो नहीं उठाया गया विवादित मुद्दा

कहा जाता है कि इस अपहरण कांड के बाद पांच आतंकियों को रिहा करने के बाद ही घाटी में आतंकवाद ने अपने पांव पैसारे और यह समस्या नासूर बनकर घाटी के बाशिंदों के जीवन में बैठ गई।

दूसरी ओर चुनावों से ऐन पूर्व किताबों के कुछ अंशों के मीडिया में आने से अपहरण कांड का मामला फिर तूल पकड़ने लगा है। जानकारों के अनुसार इस मुद्दे को चुनाव से पूर्व जानबूझकर हवा दी गई है।

वहीं अगर इस बात को सही मान लिया जाए तो फिर बड़ा सवाल यह है कि इस सारी कवायद से किसे फायदा होने वाला है? कहीं ऐसा तो नहीं घाटी की चुनावी राजनीति फिर पुराने दिनों में लौटने लगी है।
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