जम्मू-कश्मीर का पहला ड्राई पोर्ट अक्तूबर महीने में तैयार हो जाएगा। राजस्व विभाग की तरफ से ड्राई पोर्ट के निर्माण के लिए कठुआ जिले के फोरलेन गांव में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग को 221 कनाल और 11 मरला भूमि ट्रांसफर कर दी गई है। इस भूमि पर अब कंटेनर कारपोरेशन आफ इंडिया की तरफ से ड्राई पोर्ट बनाया जाएगा। सांबा में इन लैंड कंटेनर डिपो बनने से यहां पर सामान का भंडारण हो सकेगा और इससे रोजगार का सृजन भी होगा।
कठुआ में ड्राई पोर्ट और सांबा में इन लैंड कंटेनर डिपो बनेगा। कठुआ जिले के फोरलेन गांव में ट्रांसपोर्ट के विभिन्न जरिए मिलते हैं। यह रेल या रोड के जरिए जुड़ा क्षेत्र है। ड्राई पोर्ट को तैयार कर अक्तूबर में शुरू करने की योजना उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की तरफ से तैयार कर ली गई है। ड्राई पोर्ट बनने के बाद जम्मू -कश्मीर के व्यापारियों व उद्योगों को सामान खरीदने या बेचने के लिए मुंबई, दिल्ली आदि बड़े शहरों में चक्कर नहीं काटने पड़ा करेंगे।
ड्राई पोर्ट से ही कस्टम ड्यूटी चुकाकर सामान की खरीद कर पाएंगे। जम्मू कश्मीर के लिए ड्राई पोर्ट आर्थिक सुधार, रोजगार सृजन और विकास को रफ्तार देने में अहम रोल अदा कर पाएंगे। देश विदेश की कंपनियां यहां से व्यापार कर पाएगी।
कठुआ के फोरलेन गांव में ड्राई पोर्ट के लिए 221 कनाल और 11 मरला भूमि उद्योग एवं वाणिज्य विभाग को मिल गई है। कंटेनर कारपोरेशन आफ इंडिया अब यहां निर्माण कार्य करेगी। तीन से चार महीने में ड्राई पोर्ट शुरू हो जाएगा। सांबा में इन लैंड कंटेनर डिपो रहेगा। जम्मू कश्मीर के व्यापारियों को मुंबई, दिल्ली जाकर सामान नहीं खरीदना पड़ेगा। उन्हें देश विदेशी की कंपनियों का सामान ड्राई पोर्ट पर ही उपलब्ध हो जाएगा।
- रंजन पी ठाकुर, प्रधान सचिव उद्योग एवं वाणिज्य विभाग जम्मू कश्मीर
ऐसे होते हैं ड्राई पोर्ट...
ड्राई पोर्ट को मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक केंद्र भी कहा जाता है। यह ऐसे प्रदेशों में बनाया जाता है, जिनकी सीमाएं समुद्र से नहीं लगती हैं। बावजूद वहां सामान के आयात-निर्यात की सुविधाएं पोर्ट की तरह ही होती है। निर्यात को और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए देशभर में कई जगहों पर ड्राई पोर्ट तैयार किए जा रहे हैं। डाई पोर्ट में कंटेनर यार्ड, गोदाम, रेलवे साइडिंग व कार्गो हैंडलिंग उपकरण और प्रशासनिक कार्यालय भी बनाए जाते हैं।