बावे वाली माता के भवन के ठीक सामने जंगले के बीच कई बकरियों को रखा जाता है। मां के स्वरूप में पूजी जाने वाली इन बकरियों की सैकड़ों लोग पूजा करते हैं। लेकिन कोविड संकट के चलते झ्स जंगले को बाहर से बंद रखा जाएगा। जंगले के भीतर एक या दो बकरियां रखी जाएंगी, जिनके बाहर से ही दर्शन करने होंगे। उन्हें छूने की इजाजत नहीं होगी। महंत बिट्टा ने श्रद्धालुओं से अपील की कि कोविड संकट के खत्म होने तक वे मंदिर में घर से बकरियां चढ़ाने के लिए साथ में न लाएं। मंदिर में बकरियां रखने के लिए जगह नहीं है।
सरकार की एसओपी का पूरा पालन किया जाएगा
शहर के सभी मंदिरों में 16 अगस्त से आम लोगों को प्रवेश मिलेगा। हालांकि अब मंदिरों में प्रवेश और दर्शन करना पहले की तुलना में काफी अलग होगा। मंदिर में आने वाले भक्तों को भगवान की प्रतिमा, पवित्र पुस्तक और घंटी को छूने की इजाजत नहीं होगी। इसको देखते हुए मंदिरों में लगी घंटी को कपड़ा बांधा गया है। बावे वाली माता मंदिर के साथ रघुनाथ मंदिर में में भी सभी श्रद्धालुओं की थर्मल स्क्रीनिंग होगी। धर्मार्थ ट्रस्ट जम्मू-कश्मीर ने सभी मंदिरों को खोलने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की है। अध्यक्ष मुबारक सिंह के अनुसार ट्रस्ट से संबंधित सभी मंदिरों में भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सरकार की ओर से जारी एसओपी का पूरी तरह से पालन किया जाएगा।