पाकिस्तान हेरोइन (चिट्टा) को ढाल बनाकर एलओसी के रास्ते भारत को खोखला कर रहा है। नशा तस्करी से आतंकियों के लिए फंड जुटाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश के युवाओं को इसकी लत में डाला जा है। बीते तीन साल में नशा तस्करी के लिए 150 से ज्यादा रूट का इस्तेमाल किया गया है, जबकि 30 से 40 नए रूट तस्करी के लिए तलाशे जा रहे हैं।
इससे पहले के मामले
- 11 जून 2019 को 100 करोड़, 26 जुलाई 2020 को टंगधार में 50 करोड़ की हेरोइन, 14 सितंबर 2020 को राजोरी एलनओसी पर 35 करोड़ और 19 सितंबर 2020 को अरनिया में 315 करोड़ रुपये की हेरोइन मिली।
हर बार रूट बदला जा रहा
नशा तस्करी की बहुत सी संभावनाएं हैं। इसके लिए कई सारे रूट हैं। कभी भी नशा तस्कर एक रूट का इस्तेमाल नहीं करते। हर बार नया रूट बदल लिया जाता है।
- युगल मन्हास, एसएसपी कुपवाड़ा
नदी नालों से अधिक संभावना
मेंढर, राजोरी, पुंछ, आदि की एलओसी के पास कई नाले पाकिस्तान जाते हैं। इन नालों से नशा तस्करी की संभावना रहती है।
- देवेंद्र आनंद, प्रवक्ता, सेना
इन इलाकों से भेजा जा रहा जहर
करनाह, कुपवाड़ा, बारामुला, राजोरी, पुंछ, जम्मू, कठुआ से बड़े स्तर पर हेरोइन भेजी जा रही है। लगभग पूरे साल ही पाकिस्तान ने हेरोइन की सप्लाई भेजी है। कुछेक बार ड्रोन का इस्तेमाल भी किया। आतंकी संगठन पैसों का इस्तेमाल कर रहे हैं। हेरोइन भेजकर आतंकियों के लिए पैसा एकत्र किया जा रहा है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इसे लेकर अलर्ट हैं। ऐसा करने वालों पर कार्रवाई हो रही है।