बेटियों को नहीं खोनी पड़ेगी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता
जम्मू-कश्मीर में पहले 35-ए लागू था जिसके तहत यहां की बेटियों की शादी दूसरे राज्य में होने से उन्हें नागरिकता खोनी पड़ती थी। वह अपने स्टेट सब्जेक्ट (नागरिकता प्रमाण पत्र) का इस्तेमाल करके जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने या फिर पैतृक संपत्ति से हक खो बैठती थीं। नये जम्मू-कश्मीर में स्टेट सब्जेक्ट की अनिवार्यता और कानून दोनों खत्म हो गए हैं।
चौथी पीढ़ी में भी नागरिकता नहीं
पीओजेके रिफ्यूजी कैप्टन युद्धवीर सिंह चिब का कहना है कि अनुच्छेद-370 और 35 (ए) से जम्मू-कश्मीर के लोग पहले ही बहुत परेशानी झेल चुके हैं। इसके हटने से उन्हें नई जिंदगी मिली है। उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से कभी भी रिफ्यूजियों के लिए नहीं सोचा गया। यहां पर रिफ्यूजियों की चौथी पीढ़ी तक जन्म ले चुकी है पर वो आज भी यहां के नागरिक नहीं बन पाए हैं। भारत के दूसरे राज्यों में बसे रिफ्यूजियों को नागरिकता के साथ-साथ सभी हक भी मिल चुके हैं। अब सारे हक मिलने की उम्मीद है।
‘न पहले खुशी थी न आज दुखी हैं’
पीओके रिफ्यूजी राजीव चूनी का कहना है कि अनुच्छेद-370 और 35 (ए) का फायदा तो था पर इसके हटने से कोई दुख भी नहीं है। जो सुविधाएं कश्मीर से विस्थापित लोगों को मिलती हैं वो पीओके रिफ्यूजियों को कभी नहीं दी गई। पीओके रिफ्यूजियों को स्टेट स्बजेक्ट तो दे दिए गए पर स्थायी रूप से पुनर्वास नहीं किया गया। सरकार एस दिन पीओके वापसी का भरोसा देती है, जो बिल्कुल गलत है। इसी वजह से पीओके रिफ्यूजी न तो पहले खुश थे न आज दुखी हैं।