उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने ऑनलाइन डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी करने की सुस्त प्रक्रिया पर नाराजगी जाहिर की है। साथ ही अनुसूचित जाति-जनजाति सर्टिफिकेट मौके पर ही देने की हिदायत दी है। उन्होंने राजस्व अधिकारियों को लंबित सर्टिफिकेट मामले को त्वरित निस्तारित करने को कहा। वे गुरुवार को रियासी जिले में विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे।
बैठक में उन्होंने कहा कि बैक टू विलेज कार्यक्रम का अक्तूबर में शुरू हो रहे तीसरे चरण के लिए प्रत्येक पंचायत में एक महत्वपूर्ण सामुदायिक विकास के कार्यों को लिया जाए। इन कार्यों का थर्ड पार्टी आडिट भी होगा। उम्मीद योजना की समीक्षा के दौरान उन्होंने सेनेटरी पैड निर्माण में स्वयं सहायता समूहों को लगाने को कहा ताकि इसका लाभ सुदूर की महिलाओं को मिल सके। आधार आधारित शत-प्रतिशत पंजीकरण पर भी जोर दिया।
केसीसी योजना की समीक्षा के दौरान उन्होंने पाया कि पात्र किसानों तथा योजना का लाभ लेने वालों की संख्या में काफी अंतर है। इस पर उन्होंने इसका कारण पता लगाने को कहा। उन्होंने मनरेगा के कार्यों का 15 दिन में हर हाल में भुगतान करने की हिदायत दी। जलशक्ति विभाग को तय समय में प्रत्येक घर में कनेक्शन देने को कहा।
जनसमस्याओं का त्वरित निस्तारण हो
उपराज्यपाल ने जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण पर बल दिया। कहा कि सार्वजनिक सेवाओं में किसी प्रकार का विलंब नहीं होना चाहिए। जनता से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण के लिए एक तंत्र विकसित किया जाना चाहिए। जनता को विभिन्न प्रकार के सर्टिफिकेट, डोमिसाइल सर्टिफिकेट आदि के लिए इंतजार न करना पड़े। शिकायतों का निस्तारण कागजों पर नहीं बल्कि धरातल पर होना चाहिए ताकि जनता को यह लगे कि उनकी समस्याओं का हल वास्तविक रूप में हुआ है। बैठक में मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम, डिवकाम संजीव वर्मा, डीएम इंदु कंवल चिब समेत विभिन्न विभागों के प्रशासनिक सचिव थे।