पाकिस्तान में एमबीबीएस और अन्य पाठ्यक्रमों में दाखिला दिलाने की आड़ में कमाए गए पैसे से आतंकी वित्तपोषण करने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। ईडी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत कुपवाड़ा के मोहम्मद अब्दुल्ला शाह को धन शोधन मामले में पकड़ा गया है। आरोपी युवाओं को पाकिस्तान में एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के नाम पर आतंकी की राह में धकेलता था और इससे प्राप्त पैसे से आतंकियों का वित्तपोषण करता था।
पकड़े गए अब्दुल्ला शाह के पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलर मंजूर अहमद के साथ संबंध पाए गए हैं। ईडी ने बताया कि शाह ने जम्मू-कश्मीर के छात्रों के लिए पाकिस्तान के कॉलेजों में एमबीबीएस और अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश की व्यवस्था की थी। ईडी के अधिकारियों ने शाह को विशेष न्यायाधीश एसीबी (सीबीआई-मामले) श्रीनगर की अदालत के समक्ष पेश किया। अदालत ने आरोपी को 13 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
मार्च 2023 में ईडी ने श्रीनगर में तीन घरों में दी थी दबिश
जम्मू-कश्मीर पुलिस की सीआईडी शाखा काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (सीआईके) पाकिस्तान में एमबीबीएस व अन्य पाठ्यक्रमों की सीटें कश्मीरी छात्रों को बेचने के मामले में जुलाई 2020 में केस दर्ज किया था। आतंकी फंडिंग मामले की जांच ईडी की टीम भी कर रही है। 9 मार्च 2023 में ईडी ने श्रीनगर में कई स्थानों पर छापे मारे। सूत्रों के मुताबिक इस केस में तीन लोगों के घरों में ईडी की टीम पहुंची। इन जगहों से कुछ दस्तावेज बरामद किए गए।
हुर्रियत नेता समेत 9 के खिलाफ दर्ज हुआ था केस
सीआईके पास दर्ज शिकायत के अनुसार, कुछ हुर्रियत नेता और अन्य लोग कुछ शैक्षिक परामर्श केंद्रों की मिलीभगत से पाकिस्तान की एमबीबीएस तथा अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की सीटें बेच रहे हैं। केस दर्ज करने के बाद जांच एजेंसी ने चार लोगों को अगस्त में गिरफ्तार किया। उन्होंने पाकिस्तान व पीओजेके में बैठे दो लोगों के नाम पूछताछ में बताए। इसके बाद पुलिस ने हुर्रियत नेता व साल्वेशन फ्रंट के प्रमुख मोहम्मद अकबर भट उर्फ जफर भट, दक्षिण कश्मीर के एक वकील समेत नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
पैसे देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए दिए गए
अधिकारियों के अनुसार, जांच में कई सबूत भी सामने आए जिसमें पता चला कि दाखिले के नाम पर जुटाए गए पैसे कुछ आतंकी समूहों तथा अलगाववादी समूहों को देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए दिए गए।