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जम्मू-कश्मीर: घाटी में सीआरपीएफ जवानों के लिए शुरू हुआ लव यू जिंदगी प्रोग्राम

Wed, 07 Apr 2021 04:50 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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सीआरपीएफ जवानों के लिए शुरू किया गया लव यू जिन्दगी प्रोग्राम - फोटो : अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर में सीआरपीएफ ने जवानों के बीच आत्महत्याओं के मामलों को रोकने के साथ-साथ तनाव प्रबंधन, सामाजिक मुद्दों और ड्यूटी के दबाव के साथ-साथ घर की परेशानियों के कारण पैदा होने वाली नकारात्मक सोच को सकारात्मक सोच में बदलने के लिए पहली बार एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसे उन्होंने लव यू जिन्दगी का नाम दिया है। अमृता विद्या विश्व पीठ और पीपल फॉर पैरिटी ने तीन फेज में इस ट्रेनिंग प्रोग्राम को डिजाइन किया है।

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पहले चरण में इसमें 48 अधिकारियों को ट्रेनिंग दी है। इसमें सेना के 4 और बीएसएफ के 3 अधिकारी शामिल थे। इसके बाद दूसरे फेज में इन अधिकारियों ने हर कंपनी के तीन मतलब 552 जवानों को ट्रेनिंग दी। अब तीसरे फेज में यह 552 जवान घाटी में 25 हजार जवानों को प्रशिक्षित करेंगे। घाटी में जिस तरह की जवानों को ड्यूटी करनी पड़ती है उससे उनको बहुत तनाव का सामना करना पड़ता है और उस पर घर परिवार से दूर रहने के कारण घर की परेशानी भी रहती है तो एक साथ कई मुद्दों से निपटना कठिन हो जाता है।

इस कोर्स में शामिल हुए जवानों को मानसिक संतुलन बनाये रखने में काफी लाभदायक साबित होगा। कांस्टेबल रंजीत कुमार ने बताया कि इससे पहले जो नकारात्मक सोच थी, उसके चलते हम सामने वाले की बात को समझ नहीं पाते थे और उसपर रिएक्शन दे देते थे लेकिन हमें सिखाया गया है कि किस तरह से पहले बात को समझा जाता है और फिर कोई रिएक्शन दिया जाता है।
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इसके अलावा फाइनेंसियल मैनेजमेंट के बारे में भी सिखाया गया। महिलाओं के प्रति इज्जत और परिवार व अपने बीच के संतुलन को बनाये रखने के बारे में भी सिखाया गया। एक अन्य जवान बीएस राजपूत ने कहा कि इस कोर्स के माध्यम से हमें काफी कुछ सीखने को मिला है। हम अपनी ड्यूटी और घरेलू परेशानियों के बीच संतुलन बनाने में सक्षम होंगे।

लव यू जिन्दगी में मिटा रहे नकारात्मक विचारधारा
कोर्स कोऑर्डिनेटर असिस्टेंट कमांडेंट मोनिका साल्वे ने बताया कि लव यू जिन्दगी प्रोग्राम के तहत मेन्टल हेल्थ और जेंडर कन्वर्सेशन के मुद्दों को कवर कर रहे हैं। इसमें कुल 11 सेशन हैं। मानसिक स्वस्थ के बारे में जवानों को बताया जा रहा है। मोनिका के अनुसार तनाव वाले इलाकों में ड्यूटी देने के दौरान जवानों में कई मानसिक परेशानियां होती हैं।

वह अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं करते और तनाव का शिकार होते हैं। इस दबाव के चलते उनके दिमाग में नकारात्मक विचारधारा पैदा होती है जिसके नतीजे में आत्महत्या या फिर साथी जवानों पर हमले जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी होती है।

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