हाल में मुर्मू ने एक अखबार को इंटरव्यू दिया था जिसमें उन्होंने 4जी सेवाएं बहाल करने में किसी भी प्रकार की आपत्ति न होने तथा जल्द विधानसभा चुनाव कराने की भी बात कही थी। इसे लेकर चुनाव आयोग ने आपत्ति जताई थी कि चुनाव कराने का काम आयोग का है न कि उप राज्यपाल का। केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि 4जी संबंधी मुर्मू के बयानों का वह परीक्षण करेगी।
बता दें कि कल मुर्मू ने सेना की उत्तरी कमान के कमांडर से केंद्र शासित प्रदेश के सुरक्षा प्रबंधन पर चर्चा की थी। उन्हें एलओसी के साथ ही घाटी में सुरक्षा हालात और आपात स्थितियों से निपटने के लिए की गई तैयारियों के बारे में जानकारी दी गई थी।
सैन्य कमांडर ने अग्रिम और अंदरूनी इलाकों में सुरक्षा स्थिति और सेना द्वारा सफलतापूर्वक किए जा रहे आतंकवाद निरोधी अभियानों के बारे में मुर्मू को जानकारी दी थी। उप राज्यपाल ने सेना और आतंकवाद विरोधी गतिविधियों के खिलाफ काम कर रही अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच प्रभावी तालमेल बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया था। साथ ही जम्मू कश्मीर में शांति और सद्भाव के बनते माहौल को प्रभावी तरीके से बरकरार रखने की जरूरत पर भी बल दिया था।
मुर्मू के इस्तीफे को लेकर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी ट्वीट किया था।