जम्मू-कश्मीर पुलिस के राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के साथ छह दिवसीय ज्वाइंट कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम की शुरुआत सोमवार से पुलिस मुख्यालय में हुई। मुख्य अतिथि डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि प्रत्येक दिन हम सभी के लिए सीखने का अनुभव है। जांच हमारे काम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। अधिकारी इस समय का अधिकतम उपयोग अपने जांच कौशल को सुधारने और उन्हें अद्यतन करने के लिए करें।
पहले सत्र में एडीजीपी मुकेश सिंह, एमके सिन्हा, दानेश राणा, आईजीपी गरीब दास, विजय कुमार, डीआईजी सेंट्रल कश्मीर अमित कुमार, एसएसपी श्रीनगर, बडगाम, और कश्मीर जोन सीआईडी के आईओ ने भाग लिया। इनके अलावा गजटेड जांच अधिकारी और नए पास आउट एसआई ने भी भाग लिया। एडीजीपी जम्मू मुकेश सिंह ने एनआईए में अपनी प्रतिनियुक्ति के दौरान विभिन्न सनसनीखेज मामलों में काम करने और जांच के अपने अनुभव को साझा किया।
उन्होंने प्रकाश डाला कि समग्र रूप से कितनी तेजी से और परिणामोन्मुखी जांच की जाती है। सिंह ने कहा कि यह कार्यक्रम हमारी जांच दक्षता में सुधार करने में मदद करेगा। एनआईए के डीआईजी अमरेश मिश्रा ने कहा कि यह संयुक्त कार्यक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि हम अपना अनुभव साझा करेंगे। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पहले ही अपने पेशेवर काम से देश को गौरवान्वित किया है। एडीजीपी कोर्डिनेशन पीएचक्यू ने एनआईए के सदस्यों को नियुक्त करके इस कार्यक्रम को सुविधाजनक बनाने के लिए डीजी एनआईए कुलदीप सिंह का आभार व्यक्त किया।
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एनआईए के एसपी विशाल गर्ग ने एनआईए और उसकी कार्यप्रणाली का संक्षिप्त परिचय दिया। उप कानूनी सलाहकार आनंद मान ने भी ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। छह दिनों के कार्यक्रम के दौरान अधिकारी यूएपीए के संबंध में आईपीसी, सीआरपीसी और एविडेंस एक्ट के महत्वपूर्ण प्रावधानों के बारे में जानेंगे। प्रतिभागियों को साक्ष्य संग्रह, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की वसूली और संरक्षण, जांच में उचित दस्तावेज के महत्व, अपराध प्रबंधन के दृश्य, कोर्ट क्राफ्ट, खुफिया संग्रह और जांच के दौरान क्या करें और क्या न करें के बारे में बताया जाएगा।