जम्मू कश्मीर सरकार के शिक्षा मंत्री सईद अल्ताफ बुखारी ने कहा कि रियासत में करीब 41 हजार रहबर-ए-तालीम शिक्षकों (आरईटी) को राहत देते हुए सरकार ने उनकी स्क्रीनिंग नहीं कराने का फैसला लिया है।
इनमें मात्र 400 ऐसे शिक्षकों की ही स्क्रीनिंग की जाएगी, जिन्होंने स्टडी सेंटरों से डिग्रियां ली हैं। ऐसे शिक्षकों को दो बार मौका दिया जाएगा। साथ ही उनके लिए होने वाली परीक्षा में आठवीं कक्षा स्तर का पाठ्यक्रम होगा।
शिक्षकों को पूरी तरह से अकादमिक गतिविधियों में शामिल करने के लिए घाटी में आगामी लोकसभा उप चुनाव सहित अन्य व्यवस्थाओं में उनकी सेवाएं नहीं ली जाएंगी। इसके लिए मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के निर्देश पर मंडलायुक्त कश्मीर और जम्मू को दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।
'पानी की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए विशेष राशि लाई जाएगी'
पानी की व्यवस्थाओं में सुधार
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शुक्रवार को पत्रकारों से बुखारी ने कहा कि 30 अप्रैल तक रहबर-ए-तालीम और अन्य दूसरे शिक्षकों का लंबित वेतन जारी कर दिया जाएगा। केंद्र ने बकाया राशि शीघ्र जारी करने का भरोसा दिया है। शिक्षा विभाग में तबादला नीति में पारदर्शिता लाई जाएगी। जिन जगहों पर शिक्षकों की जरूरत है वहां उन्हें भेजा जाएगा।
स्कूल भवनों सहित अन्य निर्माण के लिए शिक्षा विभाग में इंजीनियरिंग विंग का गठन किया जाएगा। मिड डे मील में शिक्षकों के बजाय एनजीओ की सेवाएं लेने पर काम किया जाएगा। उन्होंने सरकारी स्कूलों में बच्चों के कम रुझान पर हामी भरते हुए कहा कि निजी स्कूलों की फीस व्यवस्था का अधिकार न्यायालय की ओर से गठित फीस कमेटी के पास है। इसमें सरकार कोई फेरबदल नहीं करती है। स्कूल, कालेजों में शौचालय, पानी की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए विशेष राशि लाई जाएगी।
सरकारी स्कूलों में नतीजों के आधार पर शिक्षकों को पदोन्नति मिलेगी। कांट्रैक्चुअल शिक्षकों की भूख हड़ताल पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि फिलहाल कांट्रैक्चुअल शिक्षकों के लिए कोई नीति नहीं है, अकादमिक व्यवस्थाओं में उनके साथ एक एक साल का अनुबंध किया जाता है, लेकिन अगर सरकार कोई नीति बनाती है तो उस पर काम किया जाएगा। एसआरओ 66 पर काम किया जा रहा है।