विधायक निधि की तर्ज पर प्रदेश में ब्लॉक विकास निधि का गठन किया गया है। उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू ने निधि के गठन को मंजूरी दी। पंचायतों को और अधिक शक्ति संपन्न बनाने तथा विकास की गति को तेज करने के उद्देश्य से इसका गठन किया गया है।
प्रत्येक ब्लॉक के लिए निधि को मंजूरी दी गई है। इसके लिए 25 लाख रुपये निर्धारित किया गया है। ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल (बीडीसी) के चेयरमैन को इस राशि को विकास कार्यों के लिए खर्च करने का अधिकार दिया गया है। इस राशि से ब्लॉक स्तर पर विकास कार्यों को पूरा कराया जाएगा। विकास कार्यों को चिह्नित करने में स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी। ज्ञात हो कि पंचायतों को अधिकार संपन्न बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार की ओर से कई कदम उठाए गए हैं। इसके तहत इन्हें हाल ही में खनन का लाइसेंस भी जारी किया गया है। इसके साथ ही कई मामलों में टैक्स वसूली का अधिकार भी सौंपा गया है।
जनता की शिकायतों के समाधान के लिए बनाए गए जम्मू-कश्मीर सरकार के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को केंद्र सरकार के जन शिकायत पोर्टल से एकीकृत कर दिया गया है। शिकायतों के प्रभावी निपटारे के लिए रक्षा मंत्रालय के आईआईटी कानपुर तथा प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग के साथ त्रिपक्षीय करार के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह जानकारी दी। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और डॉ. सिंह की उपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर हुए।
जितेंद्र सिंह ने कहा, केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के तहत काम करने वाला जन शिकायत व प्रशासनिक सुधार विभाग भी जम्मू-कश्मीर सरकार के ‘आवाज-ए-अवाम’ पोर्टल के लिए डैशबोर्ड तैयार करने में मदद कर रहा है। इससे जन शिकायतों को विभिन्न वर्गों के तहत श्रेणीबद्ध करने में मदद मिल पाएगी।
केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री ने जन शिकायत सेल को प्रशासन में जन भागीदारी का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने 2014 में सत्ता संभाली थी तो हर साल तकरीबन 1.5 लाख जन शिकायतें ऑनलाइन तरीके से दर्ज कराई जाती थीं, जो अब बढ़कर करीब 20 लाख प्रति वर्ष तक पहुंच चुकी हैं।
उन्होंने कहा, यह जन शिकायतों के त्वरित और समयबद्ध निस्तारण के कारण ही संभव हो पाया है, जिसके चलते जनता में अपनी शिकायतों को सेंट्रल पब्लिक ग्रिवेंस रिड्रेसल एंड मॉनीटरिंग सिस्टम (सीजीआरएएमएस) के जरिये दर्ज कराने का विश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा, कोरोना वायरस महामारी के दौरान भी सीपीजीआरएएमएस ने इससे जुड़ी शिकायतों के लिए एक अलग विंडो तैयार की और हर शिकायत को औसतन 1.4 दिन से भी कम समय में निस्तारित कर दिखाया है।