लोगों का दर्द...
बारिश-बाढ़ ने अरमानों पर पानी फेरा कुलदीप कुमार ने कहा कि शिविर से रोज घर जाता हूं। घर की हालत देख आंसू आ जाते हैं। एक-एक पाई जोड़कर घर बनाया था। बारिश और बाढ़ ने अरमानों पर पानी फेर दिया है। मदद के नाम पर अभी तक आश्वासन ही मिले हैं। खानाबदोशों की तरह शिविरों में कितने दिन बिताएंगे। प्रशासन और सरकार से गुजारिश प्रभावित लोगों की जल्द मदद की जाए।
घरों में दो फुट तक जम चुका कीचड़
सुनीता देवी ने कहा कि 25 दिनों से शिविर में दिन काट रहे हैं। गांव के अधिकांश लोग मजदूरी कर पेट पालते हैं। घरों की हालत बदतर हो चुकी है। घरों में दो फुट तक कीचड़ जम चुका है। बदहाल मकानों की हालत सुधारने की हैसियत नहीं है। घर में रखा राशन, कपड़े और जरूरी सामान बह गया है। अब सरकार पर ही आस है।
खंडहर और वीरान पड़े घर
खुशी देवी ने कहा कि जिन मकानों को संवार कर घर बनाया था। आज वो खंडहर और वीरान पड़े हैं। इलाके से पानी की निकासी का कोई साधन नहीं है। बारिश होने पर हर बार घरों में जलभराव और गाद भर जाती है। इस बार तो बारिश ने घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया है।
प्रशासन कर रहा नुकसान का आकलन
जिला प्रशासन ने बाढ़ से प्रभावित लोगों के रहने की व्यवस्था बस स्टैंड के पास सामुदायिक भवन में की है। लोगों के लिए बिस्तर, तीन वक्त का भोजन और मेडिकल टीम का इंतजाम किया गया है। प्रभावित इलाकों से पंप लगाकर पानी निकाला जा रहा है। प्रशासन की तरफ से राहत और बाढ़ प्रबंधन के हर संभव प्रयास जारी हैं। प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है। रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजी जाएगी। जोधराज भगत, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, सांबा