भारतीय पासपोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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जम्मू-कश्मीर में अब भ्रष्टाचार में संलिप्त कर्मचारियों को पासपोर्ट जारी नहीं हो सकेगा। सरकारी कर्मचारियों को विजिलेंस क्लियरेंस लेना पड़ेगा, जिसके आधार पर संबंधित विभाग एनओसी दे सकेंगे। सरकार ने आदेश जारी कर विजिलेंस क्लियरेंस को अनिवार्य कर दिया है। यह व्यवस्था भ्रष्टाचार में संलिप्त कर्मचारियों पर शिकंजा कसने के लिए की गई है। कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों, जांच और निलंबन से जुड़े मामलों में अभी तक पासपोर्ट जारी न करने का कोई व्यवस्थागत आधार नहीं था।
प्रदेश सरकार के आदेश में कहा गया है कि सभी विभागों को केवल विजिलेंस क्लीयरेंस के आधार पर पासपोर्ट जारी करने के लिए एनओसी जारी करने का निर्देश देने की तत्काल आवश्यकता है। अभी सरकारी कर्मचारी सहित आम नागरिकों को पासपोर्ट आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) के सत्यापन के आधार पर जारी किया जाता है। मौजूदा प्रणाली में ऐसा कोई तंत्र शामिल नहीं है जो ऐसे कर्मचारियों को पासपोर्ट से वंचित करने में मदद करे जो या तो निलंबित हैं या गंभीर आरोपों के कारण विभागीय जांच या अभियोजन का सामना कर रहे हैं।
इसमें कहा गया है कि वर्तमान में सरकारी कर्मचारी को केवल अपने नियोक्ता को एनेक्सचर-एच पर पासपोर्ट के लिए आवेदन करने के लिए सूचित करने की आवश्यकता है। पासपोर्ट प्राप्त करने के दिशा-निर्देशों की समीक्षा कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार द्वारा केंद्रीय विजिलेंस आयोग और विदेश मंत्रालय (एमईए) के परामर्श से की गई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की ओर से भी सरकार के ध्यान में सरकारी कर्मचारियों के लिए विजिलेंस क्लीयरेंस की आवश्यकता बताई गई है।