जम्मू-कश्मीर में ये सीट रहस्यमयी है। यहां हैट्रिक से लेकर निर्दलीयों को मौका मिला है। इस बार भी वोटर चुप हैं। कांग्रेस के विकार रसूल वानी हैट्रिक की उम्मीद में हैं। नेकां ने नया चेहरा इम्तियाज अहमद को उतारा है। भाजपा के सलीम भट समेत आजाद मैदान में हैं।
पीर पंजाल की वादियों में बसे बनिहाल के वोटर पहाड़ों की तरह ही रहस्यमय हैं। पार्टी के चेहरों को मात देकर यहां के लोग दो बार स्वतंत्र उम्मीदवार को विधानसभा भेज चुके हैं, तो एक उम्मीदवार की हैट्रिक भी लगवा चुके हैं। कांग्रेस प्रत्याशी विकार रसूल वानी यहां से दो बार के विधायक हैं और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
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गठबंधन के बावजूद नेकां ने यहां से प्रत्याशी उतारा है। चिनाब घाटी में सेंध लगाने वाली भाजपा की नजर अब इस सीट पर भी है। आजाद इस बार भी चुनौती पेश करने के मूड़ में हैं। विधानसभा क्षेत्र में पहले चरण में 18 सिंतबर को मतदान है। बनिहाल जम्मू संभाग का वो आखिरी विधानसभा क्षेत्र है, जो कश्मीर को काजीगुंड के रास्ते जम्मू से जोड़ता है।
नेकां और कांग्रेस के गढ़ रह चुके मुस्लिम विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के साथ पीडीपी भी किस्मत आजमाने मैदान में हैं। वर्ष 2008 में कांग्रेस के विकार रसूल वानी को आजाद उम्मीदवारों ने चुनौती दी थी जबकि नेशनल कांफ्रेंस चौथे पायदान पर रही। वर्ष 2014 में पीडीपी यहां से दूसरे स्थान पर रह चुकी है।
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नेशनल कॉन्फ्रेंस के सज्जाद शाहीन यहां से 2008 और 2014 में जोर आजमाइश कर चुके हैं। हालांकि पीडीपी ने इस बार नए चेहरे के रूप में इम्तियाज अहमद शान को मैदान में उतारा है जिससे बनिहाल में त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना है। भाजपा से मोहम्मद सलीम भट सहित आम आदमी पार्टी और दो आजाद उम्मीदवार भी मैदान में हैं।
पहली महिला विधायक थी हाजरा बेगम
बनिहाल के इतिहास में नेकां ने चार, कांग्रेस ने तीन बार जीत दर्ज की है। बनिहाल विधानसभा क्षेत्र 1962 में वजूद में आया था। पहले चुनाव में नेकां की अख्तर नजामी ने जीत हासिल की। 1972 में कांग्रेस से हाजरा बेगम, 1977 में नेकां के मौलवी अब्दुल रशीद जीते।
मौलवी ने 1982 व 1987 में लगातार जीत हासिल कर हैट्रिक लगाई। 1996 के आजाद उम्मीदवार मोहम्मद फारूक मीर और 2002 में नेकां के मिलवी अब्दुल रशीद को आजाद उम्मीदवार के रूप में जीत मिली। 2008 और 2014 में कांग्रेस के विकार रसूल वानी विधायक रहे।
मोदी लहर में पीडीपी दे चुकी है चुनौती
चुप रहने वाला बनिहाल का वोटर परिणाम देकर ही इरादे जाहिर करता है। यही कारण है कि नेकां-कांग्रेस का गढ़ रही इस सीट पर मोदी लहर में भी पीडीपी चुनौती पेश कर चुकी है। 2014 में कांग्रेस के वानी को 17671 तो दूसरे स्थान पर रही पीडीपी को 13322 मत मिले। नेकां के मोहम्मद शाहीन 13003 वोट से तीसरे स्थान पर रहे। 2008 में वानी को आजाद उम्मीदवार से टक्कर मिली और नेकां चौथे स्थान पर खिसक गई।
पहले क्या थी पहचान
- 1950 में बनी जम्मू और कश्मीर संभाग को जोड़ने वाली ज्वाहर टनल
- हादसों के कारण सुर्खियों में रहता था बिस्लरी नाला
- पहला रेलवे स्टेशन जो कश्मीर को जम्मू संभाग से जोड़ता है
10 साल में ये बदला
- नेशनल हाईवे फोरलेन हुआ। 8.45 किमी.लंबी बनिहाल-काजीगुंड रोड टनल
- कटड़ा-बनिहाल रेल सेक्शन का निर्माण
- लगभग 11.2 किलोमीटर लंबी पीरपंजाल रेल टनल।
सड़क संपर्क बेहतर होने से लोग खुश
वर्ष 2011 की जनगणना के आधार में क्षेत्र की मुस्लिम आबादी 71.51 और हिंदू आबादी 27.4 प्रतिशत है। स्थानीय निवासी बशीर अहमद, इकबाल, जावेद खान और मोहम्मद सलीम का कहना है कि जम्मू-कश्मीर की सरहद पर बसे बनिहाल में पिछले दस साल में काफी बदलाव आया है। सड़क संपर्क बेहतर होने से विकास हुआ है और रोजगार के साधन बढ़े हैं। खासकर रेल का संचालन शुरू होने से हर वर्ग को लाभ मिलेगा। बनिहाल का नाम पहले सिर्फ सड़क हादसों की वजह से सुर्खियों में रहता था।